रिपोर्ट @शम्भूनाथ सोनी
बिरसिंहपुर--- पाली सनातन धर्म में वट सावित्री व्रत का विशेष महत्व माना गया है। आज शनिवार को वट सावित्री अमावस्या तिथि पर जिला मुख्यालय सहित समूचे जिले में महिलाओं ने आस्था व श्रद्धाभक्ति के साथ निर्जला व्रत धारण कर बरगद पेड़ की पूजा अर्चना की। प्रातःकाल से ही महिलाओं ने पूजा की सामग्री लेकर बरगद वृक्ष के पास जाकर विधिविधान से आराधना करने के साथ वट की परिक्रमा कर चारो ओर रक्षा हेतु धागा बांधा। इसके बाद बरगद वृक्ष के नीचे बैठकर कथा श्रवण किया। पूजा के दौरान फल फूल,मिष्ठान सहित विभिन्न प्रकार के पकवान अर्पित करते हुए पति की दीर्घायु व परिवार की सुख समृद्धि की कामना की। सावित्री व्रत को लेकर शनिवार को महिलाओं में विशेष उत्साह देखने को मिला। सुबह स्नान-ध्यान के बाद व्रत रखकर महिलाओं ने वट वृक्ष पर कच्चा सूत बांधते हुए भगवान विष्णु एवं माता सावित्री का स्मरण कर महिलाओं ने व्रत कथा का श्रवण किया और अखंड सौभाग्य की मंगल कामना की। ज्ञात हो कि मंदिरों एवं सार्वजनिक स्थलों पर सुबह से ही महिलाओं की भीड़ लगी रही।समूचे क्षेत्र में धार्मिक आस्था और भक्ति का माहौल बना रहा। महिलाओं ने पारंपरिक वेशभूषा में पूजा-अर्चना कर सनातन परंपरा का निर्वहन किया।
*वट सावित्री व्रत का महत्व*
सनातन धर्म में वट सावित्री व्रत का विशेष धार्मिक एवं आध्यात्मिक महत्व माना गया है। यह व्रत सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य एवं अखंड सौभाग्य की कामना के लिए रखती हैं। ज्येष्ठ मास की अमावस्या को मनाया जाने वाला यह व्रत पति-पत्नी के अटूट प्रेम और समर्पण का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार माता सावित्री ने अपने तप, श्रद्धा और दृढ़ संकल्प से यमराज से अपने पति सत्यवान के प्राण वापस प्राप्त किए थे। तभी से महिलाएं माता सावित्री की पूजा कर वट वृक्ष की परिक्रमा करती हैं और सुखी दांपत्य जीवन की कामना करती हैं। वट वृक्ष को दीर्घायु एवं जीवन का प्रतीक माना जाता है। इस दिन महिलाएं वट वृक्ष की पूजा कर कच्चा सूत बांधती हैं तथा व्रत कथा का श्रवण करती हैं। मान्यता है कि इस व्रत को श्रद्धा और विधि-विधान से करने पर परिवार में सुख-शांति एवं समृद्धि बनी रहती है।



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