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बिजुरी ब्लास्ट साइडिंग से उड़ती कोयले की धूल पर बढ़ा आक्रोश, वार्डवासियों ने की प्रभावी कार्रवाई की मांग

 


रिपोर्ट @मिर्जा अफसार बेग 

अनूपपुर। नगर पालिका बिजुरी के वार्ड क्रमांक 7 में संचालित ब्लास्ट साइडिंग एक बार फिर स्थानीय नागरिकों की शिकायतों के केंद्र में आ गई है। क्षेत्र के रहवासियों का आरोप है कि साइडिंग में होने वाली कोयला लोडिंग एवं परिवहन गतिविधियों के कारण उड़ने वाली धूल अब आसपास के रिहायशी इलाकों तक पहुंच रही है, जिससे लोगों को रोजमर्रा की जिंदगी में परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि भीषण गर्मी और तेज हवाओं के दौरान कोयले के महीन कण घरों की छतों, आंगनों, पानी की टंकियों और घरेलू उपयोग की अन्य वस्तुओं पर जमा हो रहे हैं। कई परिवारों ने बताया कि खिड़कियां और दरवाजे बंद रखने के बावजूद धूल की समस्या से पूरी तरह राहत नहीं मिल पा रही है। नागरिकों का मानना है कि इस स्थिति का सबसे अधिक असर बच्चों, बुजुर्गों और श्वसन संबंधी परेशानियों से जूझ रहे लोगों पर पड़ रहा है।

धूल नियंत्रण व्यवस्था पर उठ रहे सवाल

रहवासियों का आरोप है कि साइडिंग क्षेत्र में धूल नियंत्रण के लिए किए जा रहे उपाय पर्याप्त नहीं हैं। उनका कहना है कि पानी के नियमित छिड़काव, कोयले के भंडारण और परिवहन के दौरान अपनाए जाने वाले पर्यावरणीय मानकों का और अधिक प्रभावी तरीके से पालन किया जाना चाहिए, ताकि आसपास के क्षेत्रों में प्रदूषण का प्रभाव कम हो सके।

शिकायतों के बावजूद समाधान का इंतजार

स्थानीय नागरिकों का दावा है कि इस समस्या को लेकर कई बार संबंधित विभागों और अधिकारियों के समक्ष शिकायतें रखी जा चुकी हैं, लेकिन अब तक उन्हें अपेक्षित स्तर पर राहत नहीं मिल सकी है। यही कारण है कि क्षेत्र में असंतोष बढ़ता जा रहा है और लोग प्रशासन से त्वरित हस्तक्षेप की मांग कर रहे हैं।

वार्ड क्रमांक 7 की पार्षद बिमला पटेल ने बताया कि नागरिकों द्वारा किए गए विरोध के बाद मुख्य मार्गों पर पानी का छिड़काव शुरू कराया गया है, लेकिन साइडिंग के अंदरूनी हिस्सों में अभी भी सुधार की आवश्यकता महसूस की जा रही है। उन्होंने कहा कि यदि स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ तो वार्डवासी उच्च अधिकारियों को ज्ञापन सौंपकर आगे की कार्रवाई की मांग करेंगे।

स्थानीय लोगों ने प्रशासन और संबंधित विभागों से मांग की है कि क्षेत्र का निष्पक्ष निरीक्षण कराया जाए, पर्यावरणीय मानकों के पालन की वास्तविक स्थिति की जांच की जाए तथा आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाकर नागरिकों को राहत प्रदान की जाए। फिलहाल क्षेत्रवासियों की निगाहें प्रशासन और संबंधित एजेंसियों की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।

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