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मंडी शुल्क 1.5% के विरोध में कल सौंपा जाएगा ज्ञापन* *कांग्रेस बोली - निर्णय वापस न हुआ तो सड़कों पर उतरेंगे किसान-व्यापारी

 


रिपोर्ट @शम्भूनाथ सोनी

*उमरिया।* मध्य प्रदेश सरकार द्वारा मंडी शुल्क को 1.5% किए जाने के निर्णय के विरोध में मध्य प्रदेश कांग्रेस उद्योग एवं व्यापार प्रकोष्ठ कल मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपेगा। प्रकोष्ठ ने इस निर्णय को किसान विरोधी और व्यापार विरोधी बताते हुए इसे तत्काल वापस लेने की मांग की है।

जिलाध्यक्ष *अंकित मिश्रा* के नेतृत्व में प्रकोष्ठ का प्रतिनिधिमंडल कल प्रबंध संचालक, मंडी बोर्ड के माध्यम से ज्ञापन सौंपेगा। ज्ञापन में कहा जाएगा कि मंडी शुल्क में बढ़ोतरी से कृषि उपज की लागत सीधे बढ़ जाएगी। इसका सबसे ज्यादा नुकसान किसान को होगा क्योंकि उसे अपनी उपज का उचित मूल्य नहीं मिल पाएगा। वहीं लागत बढ़ने से बाजार में महंगाई भी बढ़ेगी जिसका बोझ आम उपभोक्ता को उठाना पड़ेगा।

व्यापारियों का कहना है कि पड़ोसी राज्यों की तुलना में मंडी शुल्क अधिक होने से मध्य प्रदेश से व्यापारियों का पलायन तय है। इससे न सिर्फ प्रदेश का व्यापार प्रभावित होगा बल्कि मंडियों से जुड़े लाखों लोगों के रोजगार पर भी संकट के बादल मंडराएंगे। लघु और मध्यम उद्यम पहले से ही मंदी से जूझ रहे हैं, ऐसे में अतिरिक्त शुल्क उनके लिए दोहरी मार साबित होगा।

कांग्रेस ने आरोप लगाया कि सरकार ने यह बड़ा फैसला लेने से पहले व्यापारी संगठनों और किसान प्रतिनिधियों से कोई संवाद नहीं किया। बिना चर्चा के थोपा गया यह निर्णय जमीनी हकीकत से कोसों दूर होने के साथ-साथ पूरी तरह जनविरोधी है।

प्रकोष्ठ ने सरकार से मांग की है कि मंडी शुल्क वृद्धि को तुरंत वापस लिया जाए, सभी हितधारकों से व्यापक चर्चा के बाद ही नई नीति बनाई जाए और भविष्य में किसी भी शुल्क वृद्धि से पहले विचार-विमर्श सुनिश्चित किया जाए।

*अंकित मिश्रा* ने कहा कि यदि सरकार ने जल्द इस निर्णय पर पुनर्विचार नहीं किया तो मध्य प्रदेश कांग्रेस उद्योग एवं व्यापार प्रकोष्ठ प्रदेशभर के व्यापारियों और किसानों के साथ मिलकर लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीके से बड़ा जनआंदोलन करेगा। उन्होंने कहा कि सरकार को किसानों और व्यापारियों की आवाज सुननी ही होगी, अन्यथा आंदोलन की पूरी जिम्मेदारी शासन की होगी।



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