रिपोर्ट @शम्भूनाथ सोनी
शिकायत कर जांच कराने की मांग
बिरसिंहपुर पाली -- कभी घने वन प्राकृतिक जलवायु उसकी छाया, सुखद हवा और वन्य प्राणियों के लिए बहु प्रसिद्ध घुनघुटी की तस्वीर आज बदल गयी है,अब यह उतनी ही अपने काले कारनामों और भष्ट्राचार के लिये बदनामी के आरोपों से घिरा हुआ है।ग्राम पंचायत में होने वाले निर्माण कार्य हो या सामग्री खरीदी में तीखे भ्रष्टाचार की काली परछाई ने इस ग्राम पंचायत को पूरी तरह अपने आगोश में समेट लिया है। ग्राम पंचायत में हुये तमाम घोटालों की शिकायत गाँव के ही गणमान्य नागरिकों ने करते हुए निष्पक्ष जाँच की मांग प्रशासन से की गयी है। ग्रामीणों ने आरोप लगाते हुए कहा है की पूर्व में भी वर्तमान सरपंच के पति जीवन बैगा को भष्ट्राचार के गंभीर आरोपों में सरपंच पद की जीवन लीला समाप्त की जा चुकी हैं, अब जबकि सरपंच श्रीमती सिरतिया बाई सिर्फ नाम मात्र की सरपंच है, पंचायत उसी लीक पर चल पडी है। इतना ही नही सिरवतिया बाई सरपंच घुनघुटी के ऊपर भी इसके पूर्व दो बार शासकीय धन राशि के गबन के प्रमाणित आरोप लगे हैं। नियमानुसार इन्हें चुनाव लड़ने की पात्रता नहीं रखती है, लेकिन प्रशासनिक रवैये की ढुलमुल नीति के कारण गबन कर्ता को एक बार फिर से ग्राम पंचायत के तिजोरी की चाबी सौंप दी गई है। मालुम होवे की पिछले दिनों जिला पंचायत के मुख्य कार्य पालन अधिकारी जो सबको अभय कर बैठे है ने भी नोटिस के जरिये लगभग तीन लाख शासकीय कार्यो जो की दो किस्तों में बतायी जा रही है, को जमा करने के आदेश प्रसारित किये गए थे, वह भी ठण्डे बस्ते में कैद हो गयें है। बताया जाता है कि ग्राम पंचायत में चल रहे इस भष्ट्राचार के खेल में अधिकारियों की मिलीभगत से शासकीय राशियों का खुला गबन कर सरपंच सिरतिया बाई ने भ्रष्टाचार का नया इतिहास गढ दिया है। चाहे वह निर्माण कार्य हो या हितग्राही मूलक, स्वच्छता अभियान ,प्रधानमंत्री आवास योजना हो या सामग्री खरीदी का मामला हो सब पर खुल्लम खेल फर्रूखाबादी लगातार चला रहे है। यहाँ लोगों को सूचना अधिकार के तहत जानकारी न देकर मौलिक अधिकारों का हनन किया जा रहा है। ग्राम पंचायत की इस कुत्ते पन की कार्य शैली से तंग आकर अब लोग कलेक्टर , कमिश्नर के दरबार में फरियाद लगाते घुम रहे हैं। शिकायत कर्ताओं ने कहा की सही समय पर अगर न्याय न मिला तो मजबूर होकर न्याय के लिए अंतत: न्यायलय की शरण में जायेंगे ताकि शासकीय धन के बंदरबाँट पर अंकुश लग सके।
कभी नहीं बैठते सचिव
एक कहावत है की राम मिलायी जोड़ी, एक अंधा एक कोढी। शायद यह कहावत घुनघुटी ग्राम पंचायत के लिए ही तैयार की गयी थी, जो दशकों बाद भी सटीक बैठ रही हैं। विदित होवे की पूरे जनपद क्षेत्र में बदनाम सचिव विजय सिंह, जिसे तमाम आरोपों के बाद गोयरा से निलंबन के बाद घुनघुटी ग्राम पंचायत की कमान सौंपी गई है, जैसे सरपंच पर शासकीय धन राशि के गबन के प्रमाणित आरोप है वैसे ही विजय सिंह पर भी शासकीय धन राशि के घोटाले के आरोप, शासकीय कार्य में उदासीनता जैसे आरोपों में लगभग आधा दर्जन बार निलंबन का इतिहास रचने के बाद अब घुनघुटी में ग्राम पंचायत में भी भष्ट्राचारो की बुनियाद गढ रहे हैं। यह ऐसे सचिव है जो की प्रशासनिक अधिकारियों के आदेश की रत्ती भर परवाह नहीं करते। जिला पंचायत से मिले अभय दान के बाद यह भष्ट्राचार पर विजय हासिल कर बैठे है। यह न कभी ग्राम पंचायत कार्यालय में बैठते और ना ही जन कल्याण शिविरों में पहुचते। अमिलिहा ग्राम पंचायत में आयोजित जन कल्याण शिविर में वह तीनों दिन नदारद रहे, पेशा एक्ट के दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में नदारद रहे, जिसकों लेकर अनुविभागीय अधिकारी मीनाक्षी इंगले से भी बताया गया था, लेकिन हर करामात पर विजय हासिल कर बैठे सचिव पर कभी आंच नहीं आती।
ग्रामीणों व्दारा की गयी शिकायत पर जिला प्रशासन क्या कार्यवाही करता है, उस पर सबकी निगाहें टिकी हुई है, कही फिर से उन्हें अभय दान वीर अभय न कर बैठे।



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