रिपोर्ट @मिर्जा अफसार बेग
अनूपपुर। जिले के खांड़ा क्षेत्र से एक बेहद संवेदनशील मामला सामने आया है, जहां भालू विचरण क्षेत्र माने जाने वाले वन क्षेत्र के भीतर 14 लोगों के दो परिवार झोपड़ियां बनाकर रह रहे हैं। इनमें छोटे बच्चे भी शामिल हैं। सूचना मिलने के बावजूद समय पर कार्रवाई नहीं होने के आरोपों ने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
भालू विचरण क्षेत्र में बसा अस्थायी डेरा
ग्राम पंचायत खांड़ा की सरपंच कमला सिंह और सचिव गोरेलाल केवट द्वारा तैयार पंचनामा के अनुसार, शिवपुरी जिले के गोदरी क्षेत्र से आए दो परिवार यहां झोपड़ियां बनाकर रह रहे हैं। पूछताछ में उन्होंने बताया कि उन्हें अनूपपुर के ठेकेदार लकी वर्मा काम के लिए यहां लेकर आए हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि जिस स्थान पर ये झोपड़ियां बनी हैं, वह वनभूमि का हिस्सा है और यह इलाका लंबे समय से भालुओं की आवाजाही के लिए जाना जाता है।
सूचना के बाद भी कार्रवाई पर सवाल
पूर्व कांग्रेस जिला अध्यक्ष एवं पूर्व विधायक प्रत्याशी रमेश सिंह ने दावा किया कि उन्होंने स्वयं वन विभाग के रेंजर को फोन पर पूरे मामले की जानकारी दी और परिवारों को तत्काल सुरक्षित स्थान पर हटाने की मांग की। उनका आरोप है कि सूचना के बाद भी अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई।
> “यदि विभाग को पहले से खतरे की जानकारी थी और फिर भी समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो किसी भी अप्रिय घटना की जिम्मेदारी संबंधित अधिकारियों की होगी।” — रमेश सिंह
वन विभाग का पक्ष
वन विभाग के रेंजर स्वर्ण गौरव सिंह ने कहा कि जानकारी मिलते ही संबंधित लोगों को जंगल से हटकर गांव में सुरक्षित स्थान पर किराये का मकान लेकर रहने के निर्देश दिए गए हैं।
उठ रहे हैं अहम सवाल
* भालू विचरण क्षेत्र में झोपड़ियां बनने की अनुमति किसने दी?
* क्या वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची?
* क्या परिवारों को वन्यजीव हमले के खतरे से अवगत कराया गया?
* यदि मजदूरों को ठेकेदार लाया है, तो सुरक्षित आवास की जिम्मेदारी किसकी है?
खांड़ा का यह मामला केवल अवैध कब्जे का नहीं, बल्कि मानव–वन्यजीव संघर्ष और 14 लोगों की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर प्रशासनिक मुद्दा बन गया है। अब निगाहें वन विभाग और प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।



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