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बिरसिंहपुर पाली में खाद दुकानों की मनमानी, यूरिया के साथ जबरन जिंक बेचा जा रहा 1000 रुपये

 


रिपोर्ट @शम्भूनाथ सोनी
बिरसिंहपुर पाली (उमरिया) - खरीफ सीजन में खाद की किल्लत के बीच बिरसिंहपुर पाली में किसानों के साथ खुलेआम लूट हो रही है। नगर के मुख्य बाजार स्थित मां बिरासिनी कृषि विभाग नामक खाद दुकान पर यूरिया लेने पहुंचे किसानों को जबरन जिंक खरीदने पर मजबूर किया जा रहा है। दुकानदार द्वारा एक बोरी यूरिया के साथ 5 किलो जिंक का पैकेट 1000 रुपये में थमाया जा रहा है। विरोध करने पर यूरिया न देने की धमकी दी जाती है। किसानों ने इसकी शिकायत कृषि विभाग और अनुविभागीय अधिकारी से की थी पत्राचार भी हुआ है, लेकिन 15 दिन बीत जाने के बाद भी दुकानदार पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है, जिससे प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।



क्या है पूरा मामला
बिरसिंहपुर पाली कृषि प्रधान क्षेत्र है। इन दिनों धान की फसल में यूरिया की सबसे ज्यादा जरूरत है। इसी मजबूरी का फायदा दुकानदार उठा रहे हैं। किसानों का आरोप है कि मां बिरासिनी कृषि विभाग के संचालक द्वारा कहा जाता है कि बिना जिंक के यूरिया नहीं मिलेगी। सरकारी रेट पर यूरिया का दाम लगभग 267 रुपये प्रति बोरी है, लेकिन जिंक जोड़कर किसानों से प्रति बोरी 1000 रुपये तक वसूले जा रहे हैं। यानी किसान को करीब 700 से 750 रुपये का अतिरिक्त बोझ उठाना पड़ रहा है।

पाली, बिरसिंहपुर, पाली क्षेत्र और आसपास के कई गांवों के किसानों ने बताया कि दुकान पर साफ लिखा नहीं है, लेकिन मौखिक रूप से यह अनिवार्य शर्त बना दी गई है। छोटे और सीमांत किसान जो एक-दो बोरी के लिए आते हैं, वे सबसे ज्यादा परेशान हैं।
किसानों ने की शिकायत, फिर भी नहीं हुई कार्रवाई
पीड़ित किसानों ने इस संबंध में वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी और पाली अनुविभागीय कार्यालय में फोन से शिकायत दी थी। शिकायत में बिल की कॉपी और दुकानदार द्वारा जबरन जिंक देने का उल्लेख भी किया गया है। किसानों का कहना है कि शिकायत को 15 दिन से अधिक हो गए हैं, लेकिन आज तक न तो दुकान का निरीक्षण हुआ, न ही दुकानदार को नोटिस दिया गया।

एक किसानों बताया, "हमने एसडीएम तक शिकायत की, पर कोई सुनवाई नहीं हुई। दुकानदार बोलता है जहां शिकायत करनी है कर लो, मेरा कुछ नहीं होगा।"
नियम क्या कहता है
कृषि विभाग के नियमानुसार कोई भी अधिकृत खाद विक्रेता किसी भी किसान को किसी अन्य उत्पाद को खरीदने के लिए बाध्य नहीं कर सकता। इसे टैगिंग कहा जाता है और यह उर्वरक नियंत्रण आदेश 1985 के तहत पूरी तरह प्रतिबंधित और दंडनीय अपराध है। ऐसा करने पर लाइसेंस निलंबित और निरस्त तक किया जा सकता है। बावजूद इसके पाली में यह खेल खुलेआम चल रहा है।
प्रशासन की चुप्पी से बढ़ रहा आक्रोश
कार्रवाई न होने से किसानों में भारी आक्रोश है। किसानों का कहना है कि अगर प्रशासन समय रहते नहीं चेता तो वे और आगे शिकायत करने को मजबूर होंगे। क्षेत्र के किसान संगठनों ने भी इस मामले में हस्तक्षेप की मांग की है।

किसानों की मांग है कि तत्काल दुकान का स्टॉक रजिस्टर जांचा जाए, दोषी दुकानदार का लाइसेंस रद्द किया जाए और जिन किसानों से अधिक पैसा लिया गया है, उन्हें वह वापस दिलाया जाए। साथ ही खरीफ सीजन तक सभी खाद दुकानों पर कृषि विभाग के अधिकारी की निगरानी में खाद वितरण कराया जाए ताकि इस तरह की कालाबाजारी रोकी जा सके।


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