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चार साल बाद भी गरीबों को पक्की छत का इंतजार, नगर परिषद की आवास योजना पर उठे सवाल

 


रिपोर्ट @मिर्जा अफसार बेग
बरगवां-अमलाई और देवहरा में सड़क-पेयजल के काम जारी, लेकिन प्रधानमंत्री आवास योजना की प्रगति स्पष्ट नहीं; वार्ड 6 से 9 तक के जरूरतमंद परिवारों को जवाब का इंतजार

बरगवां-अमलाई। नगर परिषद के गठन को करीब चार वर्ष बीत चुके हैं, लेकिन बरगवां-अमलाई और देवहरा क्षेत्र के कई जरूरतमंद परिवारों के लिए पक्के मकान का सपना अब भी अधूरा है। नगर क्षेत्र में सड़क निर्माण, पेयजल पाइपलाइन और अन्य विकास कार्यों के बीच प्रधानमंत्री आवास योजना को लेकर उठ रहे सवाल अब स्थानीय चर्चा का विषय बन गए हैं। लोगों की मांग है कि नगर परिषद स्पष्ट करे कि आवास योजना के तहत पात्र हितग्राहियों की पहचान, सर्वेक्षण, सूची तैयार करने और लाभ दिलाने की प्रक्रिया आखिर किस स्तर पर है।

नगर परिषद बनने से पहले बरगवां और देवहरा अलग-अलग ग्राम पंचायतों के अंतर्गत आते थे। स्थानीय स्तर पर यह बात सामने आती रही है कि उस समय वार्ड क्रमांक 6 से 9 तक के कई गरीब परिवारों को प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ मिला था। हालांकि, नगर परिषद बनने के बाद इन क्षेत्रों में योजना की मौजूदा स्थिति, नए पात्र हितग्राहियों की संख्या और लंबित आवेदनों को लेकर स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है। ऐसे में जरूरतमंद परिवारों के बीच असमंजस बना हुआ है।

विकास कार्यों के बीच आवास योजना की स्थिति पर सवाल

नगर क्षेत्र में सड़क निर्माण और पेयजल पाइपलाइन जैसे कार्य दिखाई दे रहे हैं। इन कार्यों के बीच उन परिवारों की समस्या भी महत्वपूर्ण है, जो आज तक कच्चे या जर्जर मकानों में रहने को मजबूर हैं। ऐसे परिवारों के लिए पक्का मकान केवल सरकारी योजना का लाभ नहीं, बल्कि सुरक्षित जीवन और सम्मान से जुड़ी बुनियादी जरूरत है।

स्थानीय नागरिकों के बीच सवाल उठ रहा है कि जब नगर क्षेत्र में अन्य विकास कार्य आगे बढ़ रहे हैं, तो आवास योजना के पात्र हितग्राहियों को लाभ दिलाने की प्रक्रिया में कितनी प्रगति हुई है। क्या जरूरतमंद परिवारों का नया सर्वे कराया गया है? क्या पात्रता के आधार पर सूची तैयार की गई है? कितने परिवारों को योजना का लाभ मिला और कितने अब भी प्रतीक्षा कर रहे हैं? इन सवालों पर आधिकारिक जानकारी सामने आना जरूरी है।

पार्षदों से लेकर नगर परिषद अध्यक्ष तक जवाबदेही की मांग

वार्ड क्रमांक 6 से 9 तक के जरूरतमंद परिवारों की स्थिति को लेकर स्थानीय जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। नागरिक जानना चाहते हैं कि संबंधित पार्षदों ने आवास से वंचित परिवारों की समस्याओं को परिषद की बैठकों में कितनी गंभीरता से उठाया है। साथ ही, नगर परिषद अध्यक्ष और प्रशासन ने पात्र हितग्राहियों को योजना का लाभ दिलाने के लिए शासन स्तर पर क्या पहल की है?

यदि पात्र हितग्राहियों की सूची शासन को भेजी जा चुकी है, तो उसमें कितने परिवार शामिल हैं? यदि आवास निर्माण के लिए लक्ष्य या स्वीकृति लंबित है, तो उसके लिए अब तक क्या प्रयास किए गए हैं? और यदि किसी कारण से परिवार योजना के लाभ से वंचित हैं, तो उनकी समस्याओं के समाधान की समयसीमा क्या है?

इन सवालों का जवाब नगर परिषद की ओर से तथ्यों और आधिकारिक आंकड़ों के साथ दिया जाना चाहिए, ताकि वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके।

चुनावी वादों से पहले पिछले चार वर्षों का हिसाब जरूरी

नगर क्षेत्र में विकास कार्यों और जनहित की योजनाओं को लेकर चर्चाओं के बीच आवास का मुद्दा भी अहम होता जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि आगामी चुनावों के दौरान विकास के दावे और वादे फिर सामने आएंगे, लेकिन उससे पहले यह स्पष्ट होना चाहिए कि नगर परिषद गठन के बाद गरीब परिवारों को पक्का मकान दिलाने के लिए क्या-क्या कदम उठाए गए।

नागरिकों की अपेक्षा है कि नगर परिषद आवास योजना की वार्डवार स्थिति सार्वजनिक करे। इसमें पात्र परिवारों की संख्या, स्वीकृत आवास, निर्माणाधीन मकान, लंबित आवेदन और नए हितग्राहियों को लाभ दिलाने की प्रस्तावित कार्ययोजना जैसी जानकारियां शामिल हों। इससे न केवल पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि जरूरतमंद परिवारों को भी अपनी स्थिति समझने में मदद मिलेगी।

गरीब परिवारों को आश्वासन नहीं, स्पष्ट जवाब चाहिए

प्रधानमंत्री आवास योजना का उद्देश्य पात्र परिवारों को आवास की सुविधा उपलब्ध कराने में मदद करना है। ऐसे में बरगवां-अमलाई और देवहरा के जरूरतमंद परिवारों की उम्मीदों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। योजना का लाभ किन कारणों से लंबित है, पात्रता की प्रक्रिया कहां तक पहुंची है और आगे कितने समय में राहत मिलने की संभावना है—इन बिंदुओं पर नगर परिषद और संबंधित अधिकारियों का पक्ष सामने आना जरूरी है।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि नगर परिषद गठन के करीब चार वर्ष बाद भी जिन गरीब परिवारों को पक्के मकान का इंतजार है, उन्हें राहत कब मिलेगी? सड़क और पेयजल जैसी सुविधाओं के साथ आवास भी बुनियादी जरूरत है। ऐसे में नगर परिषद से अपेक्षा है कि वह योजना की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करे और पात्र परिवारों तक लाभ पहुंचाने के लिए ठोस कार्ययोजना सार्वजनिक करे।


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