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केशवाही बनता जा रहा मवेशी तस्करी का कथित गढ़!

 


रिपोर्ट @मिर्जा अफसार बेग
महुआ टोला से डोंगरी के पीछे तक संदिग्ध गतिविधियों की चर्चा, गुप्त रास्तों और कथित ‘पासवर्ड नेटवर्क’ की निष्पक्ष जांच की मांग


स्थानीय ग्रामीणों में आक्रोश, पुलिस की कार्रवाई पर टिकी निगाहें; आखिर कौन चला रहा है इस अवैध कारोबार का नेटवर्क?

शहडोल | केशवाही। शहडोल जिले के केशवाही और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में कथित मवेशी तस्करी की गतिविधियों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। महुआ टोला, खामीडोल, बचरवार और डोंगरी के पीछे स्थित सुनसान इलाकों में मवेशियों की आवाजाही तथा कथित गुप्त रास्तों के इस्तेमाल को लेकर सवाल उठ रहे हैं। क्षेत्र में सामने आ रही इन चर्चाओं ने स्थानीय ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या इन गतिविधियों के पीछे कोई संगठित नेटवर्क सक्रिय है और यदि ऐसा है, तो इसकी जड़ें कहां तक फैली हैं?

गुप्त रास्तों से मवेशियों की आवाजाही का दावा

स्थानीय स्तर पर मिल रही कथित जानकारियों के अनुसार, महुआ टोला, खामीडोल और बचरवार गांव के आसपास के जंगलों तथा डोंगरी के पीछे के सुनसान रास्तों का इस्तेमाल मवेशियों को ले जाने के लिए किए जाने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि, इन रास्तों से तस्करी होने और इसके पीछे किसी संगठित गिरोह के सक्रिय होने की आधिकारिक पुष्टि अभी आवश्यक है। ऐसे में पुलिस जांच के जरिए वास्तविक स्थिति स्पष्ट करना बेहद जरूरी हो गया है।

‘पासवर्ड सिस्टम’ की चर्चा, जांच से सामने आएगी सच्चाई

इस पूरे मामले में कथित सांकेतिक शब्दों अथवा पासवर्ड के इस्तेमाल की चर्चा भी सामने आ रही है। दावा किया जा रहा है कि ऐसे संकेतों के जरिए आपसी संपर्क और रास्तों की जानकारी साझा की जाती है, ताकि गतिविधियों को गोपनीय रखा जा सके। यदि इन दावों में सच्चाई है, तो यह जांच का गंभीर विषय है। पुलिस को संभावित संचार माध्यमों, संदिग्ध गतिविधियों और आवागमन के रास्तों की जांच कर तथ्यों के आधार पर कार्रवाई करनी चाहिए।

कई नाम चर्चा में, आरोपों की पुष्टि जरूरी

क्षेत्र में फिरोज, कलाम, आरिफ, दादू, आजम, फहीम, नरेंद्र और जीत बिजली सहित कुछ लोगों के नाम कथित तौर पर चर्चा में बताए जा रहे हैं। हालांकि, इन व्यक्तियों की संलिप्तता के संबंध में कोई पुष्ट आधिकारिक जानकारी उपलब्ध नहीं है। इसलिए जांच पूरी होने और पर्याप्त साक्ष्य सामने आने से पहले किसी को दोषी ठहराना उचित नहीं होगा। पुलिस को संबंधित शिकायतों, उपलब्ध साक्ष्यों और आपराधिक रिकॉर्ड की नियमानुसार जांच करनी चाहिए, ताकि वास्तविक दोषियों की पहचान हो सके।

ग्रामीणों में नाराजगी, सघन जांच अभियान की मांग

कथित मवेशी तस्करी की चर्चाओं से क्षेत्र के ग्रामीणों में नाराजगी बताई जा रही है। ग्रामीणों की मांग है कि डोंगरी के पीछे, महुआ टोला, खामीडोल और बचरवार के आसपास के संवेदनशील इलाकों में प्रभावी गश्त और जरूरत के अनुसार सघन जांच अभियान चलाया जाए। साथ ही, पशुओं के अवैध परिवहन में शामिल पाए जाने वाले लोगों के विरुद्ध कानून के मुताबिक सख्त कार्रवाई की जाए।

ग्रामीणों का मानना है कि समय रहते जांच और निगरानी की प्रभावी व्यवस्था होने से ऐसी गतिविधियों पर अंकुश लगाया जा सकता है। संबंधित मार्गों की पहचान, संदिग्ध आवागमन की निगरानी और ग्रामीणों से प्राप्त सूचनाओं पर त्वरित कार्रवाई इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकते हैं।

अब पुलिस प्रशासन से जवाब की उम्मीद

इस मामले में सबसे अहम सवाल यह है कि क्या संबंधित क्षेत्रों में वास्तव में संगठित मवेशी तस्करी का नेटवर्क सक्रिय है? क्या कथित गुप्त रास्तों और पासवर्ड प्रणाली के दावों में कोई सच्चाई है? और क्या इन शिकायतों को लेकर पुलिस के पास कोई ठोस सूचना या जांच का आधार मौजूद है?

इन सवालों का जवाब निष्पक्ष और तथ्यपरक जांच से ही सामने आ सकता है। फिलहाल क्षेत्र के लोगों की निगाहें पुलिस प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं। यदि शिकायतों की पुष्टि होती है, तो दोषियों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई और अवैध गतिविधियों पर प्रभावी रोक लगाना आवश्यक होगा।

अब देखना यह है कि केशवाही और आसपास के क्षेत्रों में उठ रहे इन सवालों पर पुलिस प्रशासन क्या कदम उठाता है और जांच में आखिर कौन-से तथ्य सामने आते हैं।


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