रिपोर्ट @मिर्जा अफसार बेग
शहडोल संभाग की ओर से मोहम्मद ज़करिया साहब ने की सहभागिता, दीनी तालीम और मदरसों की शैक्षणिक तरक्की पर हुआ मंथन
शहडोल। मध्यप्रदेश के बुरहानपुर में राब्ता-ए-मदारिस इस्लामिया अरबिया मध्यप्रदेश का एक दिवसीय प्रांतीय सम्मेलन गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। दारुल उलूम शेख अली मुतकी, आनंदपुरा, उतावली सराय, बुरहानपुर के तत्वावधान में आयोजित इस सम्मेलन में प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से आए प्रतिष्ठित उलमा-ए-किराम, धार्मिक विद्वानों एवं मदरसों के जिम्मेदारों ने शिरकत की। सम्मेलन में दीनी तालीम को बेहतर बनाने, मदरसों की शैक्षणिक व्यवस्था को सुदृढ़ करने, आपसी तालमेल बढ़ाने तथा विद्यार्थियों के शैक्षणिक एवं नैतिक विकास जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तारपूर्वक विचार-विमर्श किया गया।
इस प्रांतीय सम्मेलन में जमीयत उलेमा मध्यप्रदेश के सदर एवं मुफ़्ती-ए-आज़म मध्यप्रदेश हज़रत मौलाना अहमद खान साहब की गरिमामयी उपस्थिति रही। वहीं, शहडोल संभाग की ओर से शहडोल शहर सदर मोहम्मद ज़करिया साहब ने सहभागिता करते हुए क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया। उनकी उपस्थिति को संभाग में दीनी तालीम, शैक्षणिक सहयोग तथा जमीयत की गतिविधियों के बीच बेहतर समन्वय की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
उलमा-ए-किराम ने दीनी तालीम और शैक्षणिक सुधार पर रखे विचार
सम्मेलन की अध्यक्षता हज़रत मौलाना मुफ़्ती अहमद खान साहब ने की। कार्यक्रम का शुभारंभ मौलाना मुफ़्ती ज़ियाउल्लाह साहब के प्रारंभिक संबोधन से हुआ। उन्होंने अपने विचार व्यक्त करते हुए दीनी तालीम की अहमियत, मदरसों के बीच आपसी सहयोग तथा समाज में इस्लामी शिक्षा की सकारात्मक भूमिका पर प्रकाश डाला।
सम्मेलन में दारुल उलूम देवबंद के मोहतमिम हज़रत मौलाना शौकत कासमी बस्तवी साहब विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि दीनी तालीम की मजबूती के लिए मदरसों के बीच बेहतर तालमेल, आपसी सहयोग और साझा शैक्षणिक उद्देश्यों के प्रति प्रतिबद्धता आवश्यक है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सभी संबंधित संस्थानों को मिलकर शिक्षा की गुणवत्ता, विद्यार्थियों के चरित्र निर्माण और बेहतर शैक्षणिक वातावरण के लिए निरंतर प्रयास करना चाहिए।
मदरसों की तरक्की और विद्यार्थियों के बेहतर भविष्य पर जोर
सम्मेलन के विभिन्न सत्रों में उलमा-ए-किराम एवं मदरसों के प्रतिनिधियों ने दीनी तालीम की गुणवत्ता में सुधार, विद्यार्थियों में अच्छे अख़लाक और अनुशासन का विकास, दीन की सही समझ, शैक्षणिक व्यवस्थाओं को मजबूत बनाने तथा संस्थानों के बीच एकता और सहयोग को बढ़ावा देने जैसे विषयों पर अपने विचार रखे।
वक्ताओं ने मदरसों के बीच प्रभावी समन्वय स्थापित करने और शिक्षा से जुड़े कार्यों को अधिक व्यवस्थित एवं परिणामोन्मुख बनाने की आवश्यकता पर बल दिया। सम्मेलन का प्रमुख उद्देश्य प्रदेश के मदरसों को आपसी सहयोग के सूत्र में जोड़ना तथा दीनी एवं शैक्षणिक गतिविधियों को और अधिक प्रभावी बनाना रहा।
सामूहिक दुआ के साथ सम्मेलन का समापन
सम्मेलन के समापन अवसर पर मुल्क में अमन-ओ-अमान, समाज की खुशहाली, मदरसों की तरक्की तथा तमाम तालिब-ए-इल्म की कामयाबी और बेहतरी के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर जोर दिया गया। साथ ही, दीनी तालीम के प्रसार और शैक्षणिक संस्थानों की मजबूती के लिए आपसी सहयोग एवं एकजुटता बनाए रखने का संदेश दिया गया।
शहडोल संभाग की सहभागिता बनी चर्चा का महत्वपूर्ण पक्ष
बुरहानपुर में आयोजित इस प्रांतीय सम्मेलन में मोहम्मद ज़करिया साहब की सहभागिता शहडोल संभाग के लिए महत्वपूर्ण रही। इससे क्षेत्रीय स्तर पर दीनी तालीम से जुड़े प्रयासों, मदरसों के बीच शैक्षणिक सहयोग तथा जमीयत की गतिविधियों के समन्वय को नई दिशा मिलने की उम्मीद है। सम्मेलन ने प्रदेशभर के मदरसों के प्रतिनिधियों को विचारों के आदान-प्रदान, आपसी संपर्क मजबूत करने और साझा शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए मिलकर आगे बढ़ने का एक महत्वपूर्ण अवसर प्रदान किया।



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