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छात्रावास में 10 वर्षीय छात्रा से कथित मारपीट का आरोप, न्याय की गुहार लेकर थाने पहुंची मासूम

 


रिपोर्ट @मिर्जा अफसार बेग
इमला लिखने में गलती होने पर डंडे से पीटने का आरोप, पैरों पर चोट के निशान होने का दावा; पुलिस जांच में जुटी


बिरसिंहपुर पाली, उमरिया। जिले के आदिवासी विकासखंड के दूरस्थ अंचल में स्थित खिचकिड़ी छात्रावास में रहकर पढ़ाई कर रही 10 वर्षीय आदिवासी छात्रा के साथ कथित मारपीट का मामला सामने आया है। कक्षा पांचवीं में अध्ययनरत छात्रा ने छात्रावास में कोचिंग पढ़ाने आने वाली शिक्षिका पर डंडे से मारपीट करने का आरोप लगाते हुए पाली थाने में शिकायत दर्ज कराई है। छात्रा की शिकायत के बाद मामला बच्चों की सुरक्षा, छात्रावास में उनकी देखरेख और शैक्षणिक संस्थानों में अनुशासन के नाम पर अपनाए जाने वाले व्यवहार को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है।

इमला लिखने में गलती हुई तो डंडे से पीटने का आरोप

छात्रा द्वारा पुलिस को दिए गए शिकायत आवेदन के अनुसार, घटना 6 अक्टूबर की है। छात्रावास में कोचिंग के दौरान मैडम बच्चों को इमला लिखवा रही थीं। इसी दौरान छात्रा से लिखने में कुछ गलतियां हो गईं। आरोप है कि इस पर नाराज होकर मैडम ने डंडे से उसके दोनों पैरों में घुटनों के पीछे की तरफ मारपीट की। छात्रा का दावा है कि मारपीट के कारण उसके पैरों पर डंडे के गहरे निशान पड़ गए।

छात्रा ने शिकायत में यह भी बताया कि घटना के समय वहां अन्य छात्राएं भी मौजूद थीं और उनके सामने ही उसके साथ कथित रूप से मारपीट की गई। यदि शिकायत में लगाए गए आरोपों की पुष्टि होती है, तो यह बच्चों के साथ व्यवहार और छात्रावास में उनकी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर मामला होगा।

पहले भी मारपीट किए जाने का दावा

शिकायत के मुताबिक, छात्रा ने 3 अक्टूबर को भी इसी तरह मारपीट किए जाने का आरोप लगाया है। हालांकि, उस समय डर के कारण उसने अपने परिजनों को इसकी जानकारी नहीं दी। छात्रा के अनुसार, 6 अक्टूबर की घटना के बाद उसने अपनी मां को फोन कर पूरी आपबीती बताई। जानकारी मिलने पर परिजन छात्रावास पहुंचे और बच्ची को अपने साथ लेकर पाली थाने गए, जहां मामले की शिकायत की गई।

छात्रावास में बच्चों की सुरक्षा पर सवाल

परिवार से दूर छात्रावास में रहकर शिक्षा प्राप्त करने वाले बच्चों की सुरक्षा और देखभाल की जिम्मेदारी संबंधित संस्थान और जिम्मेदार अधिकारियों पर होती है। ऐसे में किसी मासूम छात्रा के साथ पढ़ाई के दौरान कथित मारपीट की शिकायत सामने आना व्यवस्था की जवाबदेही पर सवाल खड़े करता है।

पढ़ाई के दौरान बच्चों से गलतियां होना स्वाभाविक है। ऐसी परिस्थितियों में उन्हें डांट-फटकार या शारीरिक दंड देने के बजाय समझाइश, धैर्य और संवेदनशीलता के साथ सुधारने की आवश्यकता होती है। खासकर आवासीय छात्रावासों में रहने वाले बच्चों के साथ व्यवहार करते समय उनकी सुरक्षा और मानसिक स्थिति का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए।

यह मामला केवल एक छात्रा की शिकायत तक सीमित नहीं है, बल्कि इस बात की भी पड़ताल जरूरी बनाता है कि छात्रावास में बच्चों की निगरानी, शिकायत सुनने और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए क्या व्यवस्थाएं प्रभावी ढंग से काम कर रही हैं।

पुलिस कर रही मामले की जांच

मामले को लेकर पाली थाना प्रभारी गोविंद सिंह धुर्वे ने बताया कि शिकायत के संबंध में जांच जारी है। पुलिस मामले से जुड़े तथ्यों की पड़ताल कर रही है। जांच पूरी होने के बाद ही आरोपों की वास्तविक स्थिति और आगे की कार्रवाई स्पष्ट हो सकेगी।

अब सवाल यह है कि छात्रावास में रहने वाले बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जिम्मेदार विभाग क्या कदम उठाएगा और शिकायत में लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच कर बच्ची को न्याय दिलाने की दिशा में क्या कार्रवाई होगी। मामले की सच्चाई जांच के बाद ही सामने आएगी, लेकिन बच्चों की सुरक्षा और सम्मान के साथ किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाना चाहिए।


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