मिर्ज़ा अफसार बेग
आज की स्वार्थपरक राजनीति सिर्फ ठेकेदारी, अपने अवैध कार्यों को सरंक्षण देने, शासकीय विभागों में लाभ प्राप्त करने, अधिकारियों से व्यवहार बनाकर अपना काम निकलवाने, मंत्रियों की चापलूसी कर ट्रांसफर पोस्टिंग करवाने, चुनाव के लिए पार्टी का टिकट लाने का एक साधन बन कर रह गई है। सब ना सही पर ज्यादातर लोग इसीलिए ही राजनीती में हैं, और जो इसलिए नहीं हैं, वे चाहे किसी भी पार्टी में हों, पर हासिये पर हैं।
मैं अक्सर देखता हूं कि काले काम करने वाले, प्राकृतिक संसाधनों को नुकसान पहुंचाने वाले, हमारा आपका और आम आदमी का हक मारने वाले, भ्रष्टाचार में सर से लेकर पैर तक डूबे हुए लोग मौक़ा देखकर अपनी इस काली कमाई का दशमलव एक प्रतिशत से भी कम खर्च करके महान बन जाते हैं, और हमारे आपके जैसे लोग पिछला सब कुछ भूलकर उनके कसीदे पढ़ने में और उन्हें माला पहनाने में व्यस्त हो जाते हैं।
हमारे भूलने की इसी बीमारी का फायदा उठाकर ऐसे लोग समाज सुधार के ठेकेदार तक बन जाते हैं। भूलने की इस बीमारी ने ही मध्यमवर्ग का सबसे ज्यादा नुकसान किया है। आप कब तक इन ठेकेदारों को आप अपना रोल मॉडल बनाते रहेंगे ?
हमें तय करना होगा कि हमारे मार्गदर्शक हमारे रोल मॉडल रानी लक्ष्मीबाई, लाल बहादुर शास्त्री और ए.पी.जे. अब्दुल कलाम जैसे महापुरुष हैं या ...........ये धनकुबेर।

0 Comments