रिपोर्ट @संतोष कुमार मिश्रा
जिले भर में तस्करी कर रहा नौरोजाबाद का शराब माफिया
बैच नंबर से खुल सकते हैं राज, विभाग की संलिप्तता
उमरिया --- जिले के बिरसिंहपुर पाली में बीते दिवस अवैध शराब को जब्त कर पाली पुलिस ने शानदार कार्यवाही की है, लेकिन इस मामले में आधी अधूरी कार्यवाही कर मामले को दफन कर दिया गया है, जबकि इस मामले में पुलिस को असली सरगना तक पहुंचने का मार्ग आसान हो चुका था।बताया जाता है की नौरोजाबाद लाइसेंसी दुकान से शराब तस्करी का मामला जग जाहिर बना हुआ है और वह अपने निर्धारित कार्य स्थल से बाहरी क्षेत्रों में शराब की तस्करी कर अपने काले व्यवसाय को दिन दुगना रात चौगुना बढा रहे हैं।नौरोजाबाद क्षेत्र में शराब की पैकारी तो खुलेआम जारी है ही इन्होंने अपने कार्यक्षेत्र के बाहर भी तस्करी के ठिकाने बना रखे है। जिस पर पाली पुलिस ने कार्यवाही कर अपनी उपस्थित दर्ज करायी है। अलबत्ता इस मामले में पाली पुलिस ने प्यादेे के ऊपर कार्यवाही कर मुख्य सरगना को एक बार फिर अभय दान दे दिया गया है। शराब तस्करी का यह मामला एक बार फिर चर्चा में है की आखिर कार पाली पुलिस के लंबे हाथ बौने क्यों पड गये। विदित होवे की बीते दिवस नौरोजाबाद से पाली आ रही बीयर की खेप के साथ एक युवक को पकडक़र पाली पुलिस ने कार्यवाही की थी।, इस युवक के पास से 36 नग बीयर जब्त की गयी थी।शराब तस्करी के मामले में अनिल सिंह राजपूत को गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे पहुंचा दिया गया है, लेकिन इस पूरे मामले में सफेदपोश शराब ठेकेदार का नाम पुलिस की एफआईआर और पूंछतांछ की प्रक्रिया से बाहर ही रखा गया रहे अनिल सिंह राजपूत पिता हरि सिंह राजपूत को धर दबोचा। तलाशी में उसके पास से 36 नग बीयर बरामद हुई। आरोपी के पास न तो कोई वैध दस्तावेज थे और न ही परिवहन का परमिट, पुलिस ने मध्यप्रदेश आबकारी अधिनियम की धारा 34(ए) के तहत मामला दर्ज कर औपचारिकता पूरी कर ली। पुलिस का दावा है कि वे अवैध नेटवर्क को तोड़ रहे हैं, लेकिन हकीकत इसके उलट नजर आती है।
किसके संरक्षण में अवैध शराब का कारोबार
आश्चर्य की बात यह है कि पुलिस ने आरोपी से पूछताछ की, वह दस्तावेज नहीं दिखा पाया, लेकिन पुलिस की तफ्तीश उस सोर्स तक नहीं पहुंच पाई जहां से यह शराब खरीदी गई थी। क्या यह मुमकिन है कि इतनी बड़ी मात्रा में बीयर की बोतलें बिना किसी ठेकेदार की मिलीभगत के सडक़ पर आ जाएं, नियमानुसार एक व्यक्ति को सीमित मात्रा से अधिक शराब बेचना अपराध है। ऐसे में जिस ठेके से यह शराब उठी, वह दुकानदार भी शराब तस्करी के इस मामले में बराबर का गुनहगार है, जितना उसे ले जाने वाला युवक है, मगर पाली पुलिस हर बार की तरह इस बार भी प्यादों के सहारे वैतरणी पार करना चाहती है,असली गुनहगारों पर हाथ डालने पर उसकी कलाईया जबाब दे जाती है। असली गुनाह गारो को जिस तरह पाली पुलिस सुरक्षा कवच प्रदान करती है उससे न तो शराब तस्करी पर रोक लग पायेंगी और न ही इस शासकीय राजस्व में कोई असर पडेगा।
आबकारी विभाग की रहस्यमयी चुप्पी
शराब की हर बोतल पर एक बैच नंबर अंकित होता है। इस नंबर के जरिए आबकारी विभाग और पुलिस चंद मिनटों में यह पता लगा सकते हैं कि यह शराब किस डिपो से निकली और किस ठेकेदार को आवंटित की गई थी। इसके बावजूद न तो आबकारी विभाग ने इस दिशा में कोई रुचि दिखाई और न ही पुलिस ने बैच नंबर की जांच करना मुनासिब समझा। यह चुप्पी कह रही है कि अवैध कारोबार को शासकीय महकमों के रहमोकरम से फल फूल रहा है। खबर तो यह भी है की नौरोजाबाद की शराब की तस्करी समीपी जिला डिण्डौरी तक पहुंचायी जा रही है। को दबा ज पड ्
कप्तान की साख पर बट्टा लगाते थानेदार
बड़ा सवाल यह उठता है कि जमीनी स्तर पर ऐसी खोखली कार्रवाई करने वाले थाना प्रभारी, आखिर कप्तान के सामने नजरें कैसे मिला लेते हैं? अपनी पीठ थपथपाने और मीडिया में वाहवाही लूटने के लिए छोटे मोहरों पर कार्रवाई करना तो आसान है, लेकिन क्या पुलिस में इतना साहस है कि वह उस शराब माफिया के गिरेबान तक हाथ डाल सके जो जिले की कानून व्यवस्था को चुनौती दे रहा है।
जनता की अदालत में पुलिस के दावे फेल
पाली क्षेत्र में अवैध शराब की बिक्री और परिवहन का यह कोई पहला मामला नहीं है। पुलिस और आबकारी विभाग के नकेल कसने के दावे कागजों तक सीमित हैं। जब तक शराब की आपूर्ति करने वाले ठेकेदारों पर कार्रवाई नहीं होगी, तब तक ऐसी धरपकड़ महज एक धोखा बनी रहेगी। अगर पुलिस वास्तव में अवैध शराब मुक्त क्षेत्र चाहती है, तो उसे अनिल जैसे मोहरों के साथ-साथ उन ठेकेदारों को भी बेनकाब करना होगा जो मुनाफे की खातिर नियम-कायदों को ताक पर रखकर मौत का सामान बांट रहे हैं।


0 Comments