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वीबी-जी रामजी योजना मजदूरों के हक़ की गारंटी है — सोनहा बीट में मजदूरी घोटाला कतई बर्दाश्त नहीं

 


रिपोर्ट @मिर्जा अफसार बेग 

*राज्य मंत्री दिलीप अहिरवार ने दिए ताबड़तोड़ कार्रवाई का आश्वासन*

अनूपपुर/बुढार। जहां एक ओर केंद्र और राज्य सरकार ग्रामीण मजदूरों को 125 दिन के रोजगार और सम्मानजनक मजदूरी की गारंटी देने के लिए वीबी-जी रामजी योजना जैसे ऐतिहासिक कदम उठा रही है, वहीं दूसरी ओर वन परिक्षेत्र बुढार के पटना सर्किल अंतर्गत सोनहा बीट में निर्माणाधीन सामुदायिक भवन में मजदूरी भुगतान को लेकर सामने आया मामला पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े कर रहा है। इसी मुद्दे पर रविवार को अनूपपुर के होटल गोविंदम में आयोजित पत्रकार वार्ता के दौरान जब सोनहा बीट में मजदूरों के शोषण का विषय उठाया गया, तो मध्यप्रदेश शासन के वन एवं पर्यावरण राज्य मंत्री तथा जिले के प्रभारी मंत्री दिलीप अहिरवार ने बेहद सख्त रुख अपनाते हुए स्पष्ट कहा—“मजदूरों के साथ अन्याय हमारी सरकार में कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा सोनहा बीट के मामले में ताबड़तोड़ कार्रवाई होगी।”

मजदूरी भुगतान में भारी गड़बड़ी का आरोप सोनहा बीट में सामुदायिक भवन निर्माण कार्य में लगे मजदूरों ने आरोप लगाया है कि—उन्हें मिनिमम वेज एक्ट के तहत तय मजदूरी नहीं दी जा रही,भुगतान में मनमानी कटौती की जा रही है,

कई मजदूरों को समय पर पैसा तक नहीं मिला,हाजिरी रजिस्टर और भुगतान सूची में गंभीर अंतर पाया गया है। यह केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि सीधे तौर पर कानून का उल्लंघन और मजदूरों के हक़ पर खुला हमला माना जा रहा है।

वीबी-जी रामजी योजना बनाम जमीनी हकीकत पत्रकार वार्ता में मंत्री दिलीप अहिरवार ने जहां वीबी-जी रामजी योजना को ग्रामीण मजदूरों की जिंदगी बदलने वाली योजना बताया, वहीं सोनहा बीट का मामला इस बात का उदाहरण बन गया कि—

“अगर योजनाएं ऊपर मजबूत हों लेकिन नीचे अमल कमजोर हो, तो गरीब मजदूर का भरोसा टूटता है।”मंत्री ने कहा कि—

सरकार मजदूरों को 125 दिन रोजगार की गारंटी दे रही है,

लेकिन कहीं भी यदि मजदूरी में गड़बड़ी हुई तो उसे साजिशन अपराध माना जाएगा। राज्य मंत्री का साफ संदेश वन परिक्षेत्र बुढार के पटना सर्किल के सोनहा बीट के मामले पर मंत्री अहिरवार ने दो टूक कहा—

“यह सिर्फ मजदूरी का मामला नहीं, यह सरकार की नीयत और प्रशासन की ईमानदारी की परीक्षा है। दोषी चाहे ठेकेदार हो या अधिकारी, किसी को छोड़ा नहीं जाएगा।”उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि—मजदूरी भुगतान की तत्काल जांच कराई जाए,दोषियों पर कठोर दंडात्मक कार्रवाई हो,और मजदूरों को उनका पूरा हक़ दिलाया जाए।

>उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला पहले ही दे चुके हैं सख्त संकेत

गौरतलब है कि इससे पहले उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला भी बुढार प्रवास के दौरान इस मुद्दे पर सख्त रुख दिखा चुके हैं।

उन्होंने मीडिया से कहा था—

“वन परिक्षेत्र बुढार में मजदूरों के शोषण के मामलों में संबंधित विभाग को तुरंत अवगत कराकर दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।”

अब जब राज्य मंत्री दिलीप अहिरवार भी उसी लाइन में खड़े दिख रहे हैं, तो साफ है कि

>सोनहा बीट मामला अब सिर्फ स्थानीय विवाद नहीं रहा, बल्कि सरकार की साख का सवाल बन चुका है।जनचर्चा से सरकार तक पहुंची आवाज़

देवहरा में हुई जनचर्चा के दौरान नगर परिषद उपाध्यक्ष राज तिवारी ने पहले ही ऐलान कर दिया था कि—“जरूरत पड़ी तो इस घोटाले को मुख्यमंत्री तक ले जाएंगे।”अब सरकार के दो बड़े चेहरों के सख्त बयानों के बाद मजदूरों में उम्मीद जगी है कि—इस बार मामला दबाया नहीं जाएगा, बल्कि उदाहरणात्मक कार्रवाई होगी।

सोनहा बीट बना सरकार की नीयत का टेस्ट केस एक तरफ मंच से वीबी-जी रामजी योजना के जरिए मजदूरों के सशक्तिकरण की बात हो रही है,

दूसरी तरफ सोनहा बीट में मजदूरों को उनका हक़ नहीं मिलना —यह विरोधाभास अब सरकार के लिए चुनौती बन गया है।अब देखने वाली बात यह होगी कि—क्या जांच वास्तव में निष्पक्ष होगी?क्या दोषियों पर FIR दर्ज होगी? और क्या मजदूरों को उनका बकाया मिलेगा?अगर ऐसा हुआ, तो यह संदेश जाएगा कि—“मोदी सरकार और मध्यप्रदेश सरकार में नाम नहीं, वाकई काम बोलता है।”लेकिन अगर फिर से चुप्पी साध ली गई, तो यह केवल मजदूरों के साथ नहीं,

बल्कि कानून और लोकतंत्र दोनों के साथ अन्याय होगा।


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