रिपोर्ट @मिर्जा अफसार बेग
प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ़ एक्सीलेंस शासकीय नेहरू महाविद्यालय बुढार के वनस्पति विज्ञान विभाग के छात्र छात्राओं , स्टाफ और साथ में महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ गंगा मिश्रा, डॉ नागमणि मानिकपुरी, डॉ अनिल कुमार उपाध्याय के मार्गदर्शन एवं डॉ मनोज कुजूर के अच्छे निर्देशन में शैक्षणिक भ्रमण किया गया। इसमें पृथ्वी की उत्पत्ति , विकास एवं इतिहास से संबंधित जानकारी प्रदान की गई। राष्ट्रीय जीवाश्म उद्यान, जो डिंडोरी जिले के घुघुवा में स्थित एक अनोखा शैक्षिक स्थल है। जो डिंडौरी एवं मंडला क्षेत्र से संग्रहण किया गया है। वहाँ पर जैव-भू रासायनिक प्रक्रिया द्वारा पेड़ो के तने, पत्तियाँ और जंतुओं (शंख, घोंघे) के कई भाग जीवाश्म भवन ,अणु-विस्थापन सिध्दांत प्रक्रिया द्वारा ये पत्थर के रुप में परिवर्तित हो गए,जो ये आज से 6.5 करोड़ या 65 मिलियन वर्षों पहले की घटना है। रोचक बात ये है कि यहां पर डायनासोर के अण्डे का भी जीवाश्म मौजूद है, जिसका छात्र छात्राओं और स्टाफ ने पृथ्वी के इतिहास को करीब से जाना और जीवाश्म का परिचय विस्तार से इसे डॉ राधेश्याम नापित ने बताए और विभिन्न प्रकार के वनस्पतियों के बारे विस्तृत जानकारी दिए।उद्यान में लगभग 6.5 करोड़ वर्ष पुराने जीवाश्म हैं, जो प्राचीन में गोंडवाना लैंड या सुपरकॉन्टिनेंट भू भाग को दर्शाता है।
इसमें श्रीमती माधुरी शर्मा, रेखा शर्मा, प्रवीण सेन,बालकृष्ण सेन वा वनस्पति विज्ञान स्टाफ का विशेष योगदान रहा।
डाॅ कुजूर ने बताया कि छात्रों के लिए यह एक अनमोल अनुभव है, जहां वे जीवाश्मों को देखकर पृथ्वी के विकास के बारे में जान सकते हैं। उद्यान में पेड़ों के जीवाश्म, पत्तियों के जीवाश्म, और अन्य पौधों के अवशेष हैं, जो छात्रों को आकर्षित करते हैं। डाॅ. नापित का अनुभव यह है कि इसे सभी विषय जैसे- जीव विज्ञान, भू-विज्ञान, इतिहास, पुरातत्व सर्वेक्षण आदि विषय के प्राध्यापक एवं छात्र छात्राओं को जरूर अध्ययन कर देखना चाहिए।
इस दौरे का उद्देश्य छात्रों को पृथ्वी के इतिहास और जीवाश्म विज्ञान के बारे में जागरूक करना है। उद्यान के अधिकारियों ने बताया कि यह दौरा छात्रों के लिए एक अनोखा अवसर है, जहां वे जीवाश्मों को देखकर पृथ्वी की उत्पत्ति और विकास के बारे में जान सकते हैं ।





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