रिपोर्ट @शम्भूनाथ सोनी
दो वर्ष पूर्व हुये थे टेंडर और अनुबंध
उमरिया -- उमरिया जिले के प्रशासनिक अधिकारियों की गैर जिम्मेदाराना और लचर कार्य शैली की झलक तो जब तब देखने - सुनने में आती ही रहती है, ऐसे ही संवेदनशील मामला जिले के पाली विकास खंड के सुंदर दादर में प्रकाश में आया है। जहाँ पर आदिवासी आश्रम शाला भवन के निर्माण के लिए वर्ष 2024 में 50 सीटर आदिवासी आश्रम शाला भवन के निर्माण कराये जाने हेतु शासन के स्वीकृति पश्चात टेंडर जारी किया गया था, निविदा प्रक्रियाओं का पूर्ण पालन विधि संगत होने के कारण संबंधित कार्य एजेंसी को कार्यादेश भी जारी कर दिये गये थे, लेकिन इन दो वर्षों में आज तक कार्य एजेंसी को भूमि ही सुलभ नहीं करायी गयी, जिस वजह से शाला आश्रम का निर्माण कार्य अधर में लटका हुआ है। आदिवासी ग्राम पंचायत सुंदर दादर एक ऐसा गाँव है जहाँ पर अभी भी पर्याप्त राजस्व शासकीय भूमि उपलब्ध है ,जो कि राजस्व अभिलेखों में भी दर्ज हैं फिर भी भूमि उपलब्ध कराने के लिए जिम्मेदार प्रशासनिक अधिकारियों की उदासीनता के कारण यह शासकीय भवन निर्माण कार्य इन दो वर्षों में शुरू नहीं हो पाया है । ध्यान देने योग्य है की कार्यादेश अनुबंध शर्तों के मुताबिक कार्य एजेंसी की निर्माण करने की बाध्यता समाप्त हो गयी है, और संबंधित कार्य एजेंसी इसका लाभ उठाते हुए बढी हुई सामग्री दरो से लगने वाली चपत से बचने के लिए बाहर निकलने का रास्ता ढूंढ रहा है। गौर तलब हैं कि अगर प्रशासनिक अधिकारी अपनी उदासीन रवैया के चहारदीवारी से बाहर नहीं निकलते तो, याकि सदा के लिए शासकीय आदिवासी आश्रम शाला के निर्माण पर रोक लग जायेगी या इसकी लंबी कीमत चुकानी पड़ेगी। बहुत सरल बात है की दो वर्ष पूर्व हुये निविदा में उस दौरान की कीमतों को दृष्टि गत करते हुए टेंडर कोड किये गए रहे होंगे, इन दो वर्षों में वैसे भी निर्माण सामग्रियों के दरो में इजाफा होना स्वाभाविक ही था फिर अब तो खाड़ी देशों में हुये युद्ध परिणामों ने भारत की अर्थव्यवस्था और पेट्रोलियम पदार्थों में आग लगा कर रख दी है। स्वाभाविक है की अगर समय का समुचित लाभ प्रशासनिक अधिकारियों ने नहीं उठाया तो शासकीय खजाने को गहरी चोट लगने से नहीं रोका जा सकता। उमरिया जिले की नवागत कलेक्टर महोदय से जनापेक्षा है की शासकीय आदिवासी आश्रम शाला भवन निर्माण के लिए आवश्यक पहल करते हुए तत्काल आवश्यक पहल करेंगी, ताकि बरसाती उफान के पहले ही भवन की आधारशिला रखी जा सकें।


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