रिपोर्ट @मिर्जा अफसार बेग
जमुना-कोतमा। देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने वाले कोयलांचल की जमीनी हकीकत एक बार फिर विकास के दावों पर सवाल खड़े कर रही है। एसईसीएल जमुना-कोतमा क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत बदरा–कुशियारा को जोड़ने वाला मुख्य मार्ग पहली ही बारिश में दलदल और तालाब में तब्दील हो गया है। सड़क पर जगह-जगह गहरे गड्ढे, कीचड़ और जलभराव ने आवागमन को बेहद जोखिमभरा बना दिया है। दोपहिया वाहन चालक आए दिन फिसलकर घायल हो रहे हैं, जबकि महिलाएं, स्कूली बच्चे, बुजुर्ग और मरीज जान जोखिम में डालकर इस मार्ग से गुजरने को विवश हैं।
विडंबना यह है कि जिस क्षेत्र से वर्षों से करोड़ों रुपये मूल्य का कोयला उत्पादन होता है और जहां से प्रतिदिन सैकड़ों भारी वाहन गुजरते हैं, उसी क्षेत्र की सबसे महत्वपूर्ण सड़क बदहाली का शिकार है। इस मार्ग से निकलने वाली खनिज संपदा सरकार के राजस्व में करोड़ों रुपये का योगदान देती है, लेकिन स्थानीय लोगों को आज भी सुरक्षित और सुगम सड़क जैसी बुनियादी सुविधा नसीब नहीं हो सकी है। ग्रामीणों का कहना है कि यह स्थिति "दिया तले अंधेरा" कहावत को पूरी तरह चरितार्थ करती है।
राखड़ से भरे हाईवा बने सड़क की बदहाली की वजह?
स्थानीय लोगों का आरोप है कि एसईसीएल और मोजर बेयर विद्युत उत्पादन कंपनी, जैतहरी के बीच हुए समझौते के बाद राखड़ से लदे भारी-भरकम हाईवा वाहनों की लगातार आवाजाही ने सड़क की हालत पूरी तरह बिगाड़ दी है। वर्षों से भारी वाहनों का दबाव और समय पर मरम्मत नहीं होने के कारण सड़क जगह-जगह धंस चुकी है। हालांकि इन आरोपों पर संबंधित विभागों का आधिकारिक पक्ष सामने नहीं आया है।
हर दिन हादसे का खतरा
बारिश के दौरान सड़क पर भरे पानी के कारण गहरे गड्ढे दिखाई नहीं देते, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। ग्रामीणों के अनुसार कई दोपहिया चालक फिसलकर घायल हो चुके हैं। स्कूली बच्चों, गर्भवती महिलाओं, मरीजों और रोजाना आने-जाने वाले मजदूरों को सबसे अधिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते सड़क की मरम्मत नहीं कराई गई, तो कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।
विकास के दावे बनाम जमीनी हकीकत
चुनावी मंचों से विकास के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन करोड़ों रुपये का राजस्व देने वाला यह क्षेत्र आज भी मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि एसईसीएल, लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी), ग्राम पंचायत और जनप्रतिनिधियों ने सड़क की स्थायी मरम्मत के लिए अब तक कोई प्रभावी पहल नहीं की है। नतीजतन हर बारिश के साथ सड़क की स्थिति और अधिक भयावह होती जा रही है।
ग्रामीणों ने दी जनआंदोलन की चेतावनी
ग्रामीणों ने एसईसीएल प्रबंधन, लोक निर्माण विभाग, ग्राम पंचायत और क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों से तत्काल सड़क का स्थायी निर्माण, समुचित जलनिकासी व्यवस्था तथा भारी वाहनों से हुई क्षति की जवाबदेही तय करने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि शीघ्र प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई, तो वे व्यापक जनआंदोलन करने को मजबूर होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित विभागों और प्रशासन की होगी।
देश को ऊर्जा देने वाले इस कोयलांचल के लोगों का कहना है कि वे केवल खनिज संपदा देने वाले नागरिक नहीं, बल्कि सुरक्षित सड़क, बेहतर बुनियादी सुविधाओं और सम्मानजनक जीवन के भी समान अधिकार रखते हैं। अब देखना यह होगा कि करोड़ों रुपये का राजस्व देने वाले इस क्षेत्र की बदहाल सड़क पर जिम्मेदार विभाग कब जागते हैं और लोगों को राहत मिलती है।



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