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"शासकीय भूमि पर वर्षों से अवैध कब्जा, उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला से सख्त कार्रवाई की मांग"

 


रिपोर्ट @मिर्जा अफसार बेग
2017 और 2018 में की गई शिकायतों पर अब तक कार्रवाई नहीं, राष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल।

शहडोल। शासकीय भूमि पर वर्षों से चले आ रहे कथित अवैध कब्जों के मामले को लेकर राष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन के प्रदेश मीडिया प्रभारी मुकेश त्रिपाठी ने मध्यप्रदेश के उप मुख्यमंत्री एवं शहडोल के प्रभारी मंत्री राजेंद्र शुक्ला से हस्तक्षेप कर दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई कराने की मांग की है।

मुकेश त्रिपाठी ने उप मुख्यमंत्री को दिए गए ज्ञापन में बताया कि उन्होंने सबसे पहले 15 दिसंबर 2017 तथा पुनः 22 फरवरी 2018 को शहडोल कमिश्नर कार्यालय में शासकीय भूमि पर ग्रामीणों द्वारा किए गए कथित अवैध कब्जों की लिखित शिकायत प्रस्तुत की थी। इस मामले की जांच अपर कलेक्टर, शहडोल को सौंपी गई थी, लेकिन वर्षों बीत जाने के बाद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि प्रशासन की निष्क्रियता के कारण अवैध कब्जाधारियों के हौसले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। उनका कहना है कि स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि गांवों की चारागाह और श्मशान भूमि तक अतिक्रमण की चपेट में है। साथ ही भविष्य में किसी शासकीय भवन के निर्माण के लिए भी पर्याप्त और सुरक्षित शासकीय भूमि उपलब्ध नहीं रह जाएगी।

मुकेश त्रिपाठी ने उप मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि शहडोल प्रशासन को तत्काल निर्देशित किया जाए कि शासकीय भूमि से अवैध कब्जे हटाने के लिए प्रभावी एवं सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए, जिससे शासन की अमूल्य संपत्ति सुरक्षित रह सके और भविष्य में जनहित के कार्यों के लिए उसका उचित उपयोग किया जा सके।

उन्होंने कहा कि समय रहते यदि प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले समय में यह समस्या और अधिक गंभीर रूप धारण कर सकती है। संगठन ने शासन से जनहित में शीघ्र कार्रवाई की अपेक्षा व्यक्त की है।




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