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2 मीटर की दूरी पर मौत का साया! जर्जर स्कूल भवन के साये में पढ़ने को मजबूर नौनिहाल, हादसा हुआ तो जिम्मेदार कौन?

 


रिपोर्ट @मिर्जा अफसार बेग
वेंकटनगर/अनूपपुर। जैतहरी तहसील के ग्राम वेंकटनगर लाइनपार स्थित शासकीय प्राथमिक विद्यालय प्रथम में मासूम बच्चों की सुरक्षा गंभीर सवालों के घेरे में है। वर्ष 2008 में निर्मित विद्यालय का पुराना भवन अब पूरी तरह जर्जर होकर खंडहर में तब्दील हो चुका है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि इस खतरनाक भवन से महज 2 से 3 मीटर की दूरी पर बने नए भवन में प्रतिदिन छोटे-छोटे बच्चे पढ़ाई करने को मजबूर हैं। वहीं विद्यालय का रसोईघर भी इसी जर्जर भवन के बिल्कुल समीप संचालित हो रहा है, जहां रोजाना मध्यान्ह भोजन तैयार किया जाता है। ऐसे में बच्चे, शिक्षक और रसोई कर्मचारी हर दिन जान जोखिम में डालकर विद्यालय पहुंच रहे हैं।



हाल ही में आई तेज आंधी और बारिश के दौरान जर्जर भवन का छज्जा और छत का बड़ा हिस्सा भरभराकर नीचे गिर गया। सौभाग्य से यह घटना रात के समय हुई, जिससे कोई जनहानि नहीं हुई। यदि यही हादसा स्कूल के समय हुआ होता तो बड़ा और दर्दनाक हादसा हो सकता था।

स्थानीय लोगों के अनुसार भवन की छतों में पानी भर चुका है, दीवारों में गहरी दरारें पड़ गई हैं और छज्जों का प्लास्टर लगातार टूटकर गिर रहा है। इसके बावजूद संबंधित विभाग की ओर से न तो भवन को ध्वस्त कराया गया और न ही बच्चों की सुरक्षा के लिए कोई प्रभावी व्यवस्था की गई है।

सबसे बड़ी चिंता यह है कि विद्यालय आने-जाने का मुख्य रास्ता इसी जर्जर भवन के बिल्कुल किनारे से होकर गुजरता है। भवन और रास्ते के बीच की दूरी महज 4 से 5 फीट है। भोजनावकाश के दौरान कई बच्चे अनजाने में इसी खंडहरनुमा भवन के आसपास खेलते भी नजर आते हैं। यदि अचानक भवन का कोई हिस्सा गिर जाए तो बड़ा हादसा होना तय माना जा रहा है। इस स्थिति ने अभिभावकों की चिंता और भय को लगातार बढ़ा दिया है।

विद्यालय के प्रधान अध्यापक केवल सिंह ने बताया कि जर्जर भवन के संबंध में कई बार लिखित एवं मौखिक रूप से संबंधित अधिकारियों को अवगत कराया जा चुका है, लेकिन आज तक न तो भवन हटाया गया और न ही सुरक्षा के लिए कोई ठोस कदम उठाया गया। उन्होंने बच्चों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए भवन को तत्काल ध्वस्त कराने की मांग की है।

ग्रामीणों और अभिभावकों का कहना है कि यदि समय रहते इस जर्जर भवन को नहीं हटाया गया और कोई अप्रिय घटना घट गई, तो उसकी पूरी जिम्मेदारी शिक्षा विभाग, संबंधित अधिकारियों और जिला प्रशासन की होगी। उन्होंने कलेक्टर, जिला शिक्षा अधिकारी एवं जनप्रतिनिधियों से तत्काल हस्तक्षेप कर विद्यालय परिसर को सुरक्षित बनाने और इस खतरनाक भवन को जल्द से जल्द हटाने की मांग की है।

सबसे बड़ा सवाल...

क्या जिला प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है, या फिर समय रहते मौत का पर्याय बन चुके इस जर्जर भवन को हटाकर मासूम बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करेगा? यह सवाल आज पूरे क्षेत्र के लोगों की जुबान पर है।



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