रिपोर्ट @मिर्जा अफसार बेग
बिजुरी/कोतमा। प्रदेश में विकास और विश्वस्तरीय सड़कों के दावों के बीच अनूपपुर जिले के कोतमा विधानसभा क्षेत्र की तस्वीर बिल्कुल अलग कहानी बयां कर रही है। राज्य मंत्री के गृह क्षेत्र बिजुरी और आसपास के इलाकों की सड़कें वर्षों से बदहाली का शिकार हैं। हालत ऐसी है कि लोगों का कहना है—"यहाँ सड़कों में गड्ढे नहीं, बल्कि गड्ढों में सड़क दिखाई देती है।"
बारिश ने इन सड़कों की हकीकत और भी भयावह कर दी है। जगह-जगह बने गहरे गड्ढे पानी से लबालब हैं, जिससे राहगीरों और वाहन चालकों को हर पल दुर्घटना का खतरा बना रहता है। रोजाना हजारों लोग इसी मार्ग से गुजरते हैं, लेकिन जिम्मेदार विभाग की उदासीनता कम होने का नाम नहीं ले रही।
हर सफर बन रहा जोखिम भरा
स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क की यह बदहाली वर्षों पुरानी है। कई बार शिकायतें और मांगें उठीं, लेकिन स्थिति जस की तस बनी हुई है। बारिश के दौरान गड्ढे पानी में छिप जाते हैं, जिससे दोपहिया वाहन चालक अक्सर दुर्घटनाग्रस्त हो जाते हैं। कई लोग चोटिल हो चुके हैं, जबकि वाहन भी क्षतिग्रस्त हो रहे हैं।
मंत्री के गृह क्षेत्र में ही बदहाल विकास
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व प्रदेश सरकार के एक राज्य मंत्री करते हैं, वहीं की सड़कें इतनी जर्जर क्यों हैं? यदि मंत्री के गृह क्षेत्र की जनता ही सुरक्षित और बेहतर सड़क जैसी बुनियादी सुविधा से वंचित है, तो अन्य क्षेत्रों की स्थिति का सहज अनुमान लगाया जा सकता है।
जनता में बढ़ रहा आक्रोश
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि लंबे समय से केवल आश्वासन मिल रहे हैं, लेकिन स्थायी समाधान आज तक नहीं हुआ। अब लोगों का धैर्य जवाब देने लगा है। उनका कहना है कि यदि जल्द ही सड़क निर्माण या व्यापक मरम्मत नहीं कराई गई, तो जनता लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन करने पर मजबूर होगी।
दावों और हकीकत के बीच गहरी खाई
बिजुरी की बदहाल सड़कें विकास के उन दावों पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं, जिनमें प्रदेश को बेहतर सड़क नेटवर्क वाला राज्य बताया जाता है। अब देखना यह होगा कि जिम्मेदार अधिकारी और जनप्रतिनिधि इस समस्या का स्थायी समाधान करते हैं या फिर जनता को यूँ ही गड्ढों से भरी सड़कों पर अपनी जान जोखिम में डालकर सफर करना पड़ेगा।


0 Comments