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सत्ता के रसूख तले दबा ‘विकास’: 16 लाख की नाली बनी ग्रामीणों के लिए मुसीबत, बेलिया बड़ी में निर्माण पर उठे गंभीर सवाल

 




रिपोर्ट @मिर्जा अफसार बेग
कोतमा/अनूपपुर। विकास कार्य यदि गुणवत्ता और पारदर्शिता के साथ किए जाएँ तो जनता को राहत मिलती है, लेकिन जब निर्माण कार्यों पर अनियमितताओं के आरोप लगने लगें तो वही विकास लोगों के लिए परेशानी का कारण बन जाता है। ऐसा ही मामला कोतमा विधानसभा क्षेत्र की ग्राम पंचायत बेलिया बड़ी से सामने आया है, जहाँ गौड़ खनिज मद से स्वीकृत लगभग 16 लाख रुपये की लागत से बन रही नाली का निर्माण ग्रामीणों के निशाने पर है। ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण कार्य में भारी अनियमितताएँ बरती जा रही हैं, जिससे लाखों रुपये की सरकारी राशि पर सवाल खड़े हो गए हैं।

ग्रामीणों के अनुसार, नाली निर्माण में गुणवत्ता के निर्धारित मानकों की खुलेआम अनदेखी की जा रही है। आरोप है कि जहाँ बेसमेंट की मोटाई निर्धारित मानकों के अनुरूप होनी चाहिए, वहाँ इसे मात्र करीब तीन इंच रखा गया है। वहीं लोहे के सरियों का जाल भी तय मानकों के विपरीत अधिक दूरी पर लगाया गया है। ग्रामीणों का कहना है कि निर्माण कार्य अभी पूरा भी नहीं हुआ है, लेकिन कई स्थानों पर नाली की दीवारों में दरारें दिखाई देने लगी हैं। उनका अंदेशा है कि पहली ही बरसात में यह निर्माण टिक नहीं पाएगा और सरकारी धन व्यर्थ साबित होगा।

महामंत्री के रसूख का आरोप, ग्रामीणों ने लगाए धमकी देने के आरोप

ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण कार्य से जुड़े प्रभावशाली व्यक्ति, जो राजनगर ग्रामीण मंडल के भाजपा महामंत्री बताए जा रहे हैं, ने शिकायत करने पर उनकी आपत्तियों को गंभीरता से लेने के बजाय कथित तौर पर दबाव बनाने का प्रयास किया। ग्रामीणों का दावा है कि उन्हें कहा गया, "मैं भाजपा का महामंत्री हूँ, मेरा क्या बिगाड़ लोगे?" यदि यह आरोप सही हैं तो यह न केवल सत्ता के दुरुपयोग का मामला है, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था और जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही पर भी गंभीर प्रश्न खड़े करता है।

मलबे और कीचड़ ने बढ़ाई ग्रामीणों की मुश्किलें

ग्रामीणों के अनुसार, नाली की खुदाई के बाद निकला मलबा और मिट्टी कई घरों के सामने ही छोड़ दी गई है। इससे आवागमन बुरी तरह प्रभावित हो गया है। पैदल चलना मुश्किल हो गया है, जबकि दोपहिया वाहन चालकों को हर समय दुर्घटना का खतरा बना रहता है। पानी की निकासी बाधित होने से पूरी सड़क कीचड़ में तब्दील हो गई है, जिससे बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं को सबसे अधिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

जिम्मेदारों की चुप्पी पर उठे सवाल

ग्रामीणों का कहना है कि निर्माण में कथित अनियमितताओं की जानकारी संबंधित विभाग के अधिकारियों और सब-इंजीनियर तक कई बार पहुँचाई गई, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इससे लोगों में यह धारणा बन रही है कि प्रभावशाली लोगों के दबाव के कारण जिम्मेदार अधिकारी भी कार्रवाई से बच रहे हैं।

ग्रामीणों की चेतावनी—जांच नहीं हुई तो होगा आंदोलन

बेलिया बड़ी के ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से पूरे मामले की उच्च स्तरीय, निष्पक्ष और तकनीकी जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि निर्माण कार्य की गुणवत्ता की जांच कर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई नहीं की गई तो वे आंदोलन और उग्र प्रदर्शन करने को मजबूर होंगे।

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या प्रशासन इन गंभीर आरोपों की निष्पक्ष जांच कर सरकारी धन के दुरुपयोग की सच्चाई सामने लाएगा, या फिर सत्ता के प्रभाव के आगे यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा। ग्रामीणों की निगाहें अब जिला प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं।


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