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11 बजे का अपॉइंटमेंट, 4 घंटे का इंतजार! शहडोल पासपोर्ट कार्यालय की सुस्त व्यवस्था से फूटा लोगों का गुस्सा

 


रिपोर्ट @मुर्तजा अंसारी

शहडोल। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी पासपोर्ट सेवा का दावा शहडोल पासपोर्ट कार्यालय में सवालों के घेरे में नजर आया। मंगलवार को सुबह 11 बजे का ऑनलाइन अपॉइंटमेंट लेकर पहुंचे दर्जनों आवेदकों को 3 से 4 घंटे तक इंतजार करना पड़ा, लेकिन इसके बावजूद कई लोगों का काम समय पर पूरा नहीं हो सका। इससे कार्यालय परिसर में नाराजगी, आक्रोश और अव्यवस्था का माहौल बना रहा।


पासपोर्ट बनवाने आए लोगों का कहना था कि यदि समय पर सेवा नहीं मिलनी थी, तो फिर ऑनलाइन अपॉइंटमेंट देने का क्या औचित्य है? लोगों ने आरोप लगाया कि कार्यालय में कार्य की गति इतनी धीमी है कि एक-एक आवेदक का काम पूरा होने में अत्यधिक समय लग रहा है। नतीजतन लंबी कतारें लग रही हैं और लोग पूरे दिन अपनी बारी का इंतजार करने को मजबूर हैं।


सबसे ज्यादा परेशानी उन लोगों को हुई जो अनूपपुर, उमरिया, कटनी, पाली, जबलपुर सहित दूर-दराज के जिलों से सुबह-सुबह शहडोल पहुंचे थे। कई लोगों ने नौकरी और व्यवसाय से छुट्टी ली, किराया खर्च किया और समय पर पहुंचने के लिए लंबी यात्रा की, लेकिन घंटों इंतजार के बाद भी उन्हें राहत नहीं मिली। महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों के साथ आए परिवारों को भी लंबे समय तक बैठे रहने के लिए मजबूर होना पड़ा।


कार्यालय के भीतर तक झांकते रहे लोग, कब आएगा नंबर—इसी इंतजार में बीता पूरा दिन

हालात ऐसे रहे कि लोग बार-बार कार्यालय के भीतर झांककर यह देखने को मजबूर थे कि आखिर उनका नंबर कब आएगा। घंटों इंतजार के बाद भी जब प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ी तो लोगों का सब्र टूटता नजर आया। कई आवेदकों ने नाराजगी जताते हुए कहा कि यदि काम इतनी धीमी गति से होना था तो उन्हें एक निश्चित समय का अपॉइंटमेंट क्यों दिया गया।

धीमी कार्यप्रणाली पर उठे सवाल, बेहतर ऑपरेटर की मांग

आवेदकों का कहना है कि जिस ऑपरेटर की कार्य गति इतनी धीमी है, उसे सिस्टम पर बैठाने का औचित्य समझ से परे है। लोगों का आरोप है कि यदि दक्ष और तेज गति से कार्य करने वाले प्रशिक्षित ऑपरेटर की तैनाती की जाए तो सैकड़ों लोगों को घंटों तक परेशान नहीं होना पड़े। उनका कहना है कि मौजूदा व्यवस्था के कारण रोजाना दूर-दराज से आने वाले लोग अनावश्यक रूप से समय, पैसा और मानसिक परेशानी झेल रहे हैं।

लोगों ने यह भी सवाल उठाया कि जब अपॉइंटमेंट का समय पहले से तय होता है, तो उसका पालन क्यों नहीं किया जाता? यदि समय प्रबंधन ही नहीं हो पा रहा है, तो इसका सीधा नुकसान आम नागरिकों को उठाना पड़ रहा है।

आवेदकों ने जिला प्रशासन और संबंधित अधिकारियों से मांग की है कि पासपोर्ट कार्यालय की कार्यप्रणाली की तत्काल समीक्षा कर पर्याप्त स्टाफ और प्रशिक्षित ऑपरेटरों की तैनाती सुनिश्चित की जाए, ताकि लोगों को समय पर सेवा मिल सके और घंटों तक लाइन में खड़े रहने की मजबूरी खत्म हो।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या संबंधित अधिकारी आम नागरिकों की इस पीड़ा को गंभीरता से लेते हुए व्यवस्था में सुधार करेंगे, या फिर 11 बजे के अपॉइंटमेंट पर पहुंचे लोगों को आगे भी शाम तक अपने नंबर का इंतजार करना पड़ेगा?

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