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संजय गाँधी ताप परियोजना के रख रखाव के नाम पर चल रहा खेला

 


रिपोर्ट @शम्भूनाथ सोनी

इकाई क्र तीन चार के मरम्मत कार्य पर उठ रहे  गंभीर सवाल

उमरिया --  मध्यप्रदेश का बहु प्रसिद्ध बिजली  उत्पादन केंद्र संजय गांधी थर्मल पावर प्लांट बिरसिंहपुर पाली में एक बार फिर  से अनियमितताओं की गूंज  उत्पादन केन्द्र से परियोजना के बाहर सुनाई दे रही है। विश्वासनीय  सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार यूनिट क्रमांक 3/4 में चल रहे मरम्मत कार्यों में तकनीकी मानकों की अनदेखी कर परियोजना को लाखों रुपये की चपत लगने की बात बतायी जा रही है। विदित होवे की इकाई क्र तीन चार के मरम्मत कार्य इन दिनों चल रहा है । मालुम होवे की इकाई क्र चार पिछले पांच माह से बेक्र डाऊन चल रही है। जिसके टरबाइन में खराबी बतायी जा रही है। 

सूत्रों का दावा है कि बंकर मरम्मत कार्य के तहत क्षतिग्रस्त स्टील प्लेटों को पूरी तरह हटाकर नई प्लेटें लगाने का प्रावधान था ,लेकिन   पुरानी प्लेटों को बदलने की जगह उसके खराब भाग की  कटिंग कर टूकडो में प्लेट लगाकर थेंगरी लगाने का काम किया जा रहा है। परियोजना में मरम्मत कार्य में लग रहें इन कथित आरोपों के अनुसार मरम्मत कार्य में  गुणवत्ता से समझौता कर कार्य को पूरा दिखाने की कोशिश की जा रही है जिससे भविष्य में संयंत्र की सुरक्षा और कार्यक्षमता भी प्रभावित हो सकती है।

प्लांट के गलियारों में यह चर्चा भी जोरों पर है कि बड़े नाम वाली कंपनियों को ठेके दिए जाने के बाद वास्तविक कार्य स्थानीय स्तर के ठेकेदारों से कराया जाता है। यदि जांच में यह तथ्य सही पाए जाते हैं तो ठेका प्रक्रिया गुणवत्ता नियंत्रण और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न लग सकते हैं।

बताया जाता है कि प्लांट में ठेकेदारों और कुछ जिम्मेदार अधिकारियों की कथित सांठगांठ को लेकर पहले भी समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। बावजूद यह बेबुनियाद नहीं कहें जा सकते, क्योंकि आये दिन खामियों के चलते परियोजना की इकाई बंद करने के समाचार मिलते हैं जो कि सही उपकरण और घटिया मरम्मत कार्य की बड़ी देन है।  परियोजना में घटिया मरम्मत कार्य की इन मुखरित खबरों से क्षेत्र के लोगों और कर्मचारियों का कहना है कि इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय तकनीकी एवं वित्तीय जांच कराई जाए। साथ ही मरम्मत कार्य भुगतान सामग्री की गुणवत्ता माप पुस्तिका (एम.बी.) तथा विडिओ ग्राफी व संबंधित अधिकारियों और ठेकेदारों की भूमिका की भी गहन जांच हो। यदि किसी स्तर पर अनियमितता या शासकीय धन के दुरुपयोग की पुष्टि होती है तो दोषियों के विरुद्ध कठोर वैधानिक कार्रवाई की जाए ताकि परियोजना के भविष्य से खिलवाड़ कर तिजोरी भरने वाले ठेकेदारो और अधिकारियों के विरुद्ध  जबाब देही तय की जा सकें।


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