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लैपटॉप खरीदी के नाम पर पंचायत को लगाया चूना!

 




रिपोर्ट @शम्भूनाथ सोनी
एक दिन के अंतराल में खरीदे दो लैपटॉप, फिर एक साल बाद उसी फर्म को ₹22,850 की मरम्मत का भुगतान; नियमों और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल


उमरिया। जिले की करकेली जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पंचायत धनवार में 5वें राज्य वित्त आयोग की राशि से लैपटॉप खरीदी एवं कंप्यूटर मरम्मत के नाम पर शासकीय धन के कथित दुरुपयोग का मामला सामने आया है। उपलब्ध अभिलेखों और पंचायत दर्पण पोर्टल की जानकारी के अनुसार एक ही फर्म से एक ही मॉडल और समान कीमत पर मात्र एक दिन के अंतराल में दो लैपटॉप खरीदे गए, जिनका कुल भुगतान ₹1.15 लाख किया गया। इसके बाद लगभग एक वर्ष पश्चात उसी फर्म को ₹22,850 कंप्यूटर मरम्मत के नाम पर भी भुगतान किया गया, जिससे पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता और वैधता पर गंभीर प्रश्न खड़े हो रहे हैं।

एक दिन में दो लैपटॉप, क्यों?

पंचायत दर्पण पोर्टल के अनुसार 07 मार्च 2023 को बिल क्रमांक 232 तथा 09 मार्च 2023 को बिल क्रमांक 233 के माध्यम से प्रेम कम्प्यूटर्स से Acer Aspire i5, 8GB RAM, 512GB SSD लैपटॉप खरीदे गए। दोनों लैपटॉप की कीमत ₹57,500-₹57,500 दर्शाई गई है। इन दोनों का कुल भुगतान 20 मार्च 2023 को एक साथ ₹1,15,000 किया गया।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि ग्राम पंचायत में पहले से कंप्यूटर उपलब्ध था, तो एक साथ दो नए लैपटॉप खरीदने की आवश्यकता क्यों पड़ी? स्थानीय सूत्रों का दावा है कि सामान्यतः एक ग्राम पंचायत में एक लैपटॉप खरीदे जाने का ही प्रावधान माना जाता है। ऐसे में दो लैपटॉप की खरीदी के लिए क्या सक्षम अधिकारी से प्रशासनिक स्वीकृति ली गई थी? यदि हाँ, तो उसके दस्तावेज कहाँ हैं?

मरम्मत का भारी-भरकम बिल

मामला यहीं समाप्त नहीं होता। अगस्त 2024 में उसी प्रेम कम्प्यूटर्स फर्म से बिल क्रमांक 174 के माध्यम से ₹22,850 कंप्यूटर मरम्मत का भुगतान भी किया गया। यह राशि भी सवालों के घेरे में है, क्योंकि स्थानीय लोगों का कहना है कि इतनी रकम में नया कंप्यूटर खरीदा जा सकता है। ऐसे में यह स्पष्ट होना चाहिए कि किस उपकरण की मरम्मत हुई, कौन-कौन से पार्ट बदले गए और उसका तकनीकी परीक्षण किसके द्वारा किया गया।

नियमों और उपयोगिता पर सवाल

ग्राम पंचायत में सामान्यतः एक सचिव और एक रोजगार सहायक की पदस्थापना होती है। ऐसे में पहले से उपलब्ध कंप्यूटर के अलावा दो अतिरिक्त लैपटॉप की वास्तविक उपयोगिता क्या थी? यदि आवश्यकता थी, तो उसका प्रस्ताव, स्वीकृति और औचित्य सार्वजनिक अभिलेखों में उपलब्ध होना चाहिए।

स्थानीय लोगों का यह भी कहना है कि संबंधित सचिव स्वयं कई बार यह कहते देखे गए हैं कि उन्हें कंप्यूटर संचालन में कठिनाई होती है। ऐसे में महंगे लैपटॉप की खरीदी की आवश्यकता और अधिक संदेह पैदा करती है।

ग्रामीणों ने उठाए गंभीर सवाल

ग्रामीणों का आरोप है कि लैपटॉप खरीदी और मरम्मत के नाम पर लगभग ₹1.38 लाख की राशि का बंदरबांट किया गया है। उनका कहना है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि—

दो लैपटॉप खरीदने की वास्तविक आवश्यकता क्या थी?

क्या सक्षम अधिकारी से पूर्व अनुमति ली गई थी?

क्या खरीदे गए दोनों लैपटॉप वर्तमान में पंचायत में उपलब्ध और उपयोग में हैं?

₹22,850 की मरम्मत में कौन-कौन से कार्य किए गए और उसका तकनीकी प्रमाण क्या है?

कहीं यह पूरा मामला केवल बिलों तक सीमित वित्तीय अनियमितता तो नहीं?


पक्ष जानने का प्रयास

इस संबंध में ग्राम पंचायत के सरपंच एवं सचिव से उनका पक्ष जानने का प्रयास किया गया, लेकिन समाचार लिखे जाने तक उनका पक्ष प्राप्त नहीं हो सका। उनका पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।


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