रिपोर्ट @शम्भूनाथ सोनी
*जिला पंचायत की दोहरी कार्रवाई कटघरे में*
*बिरसिंहपुर पाली* -- उमरिया जिले की *पाली जनपद पंचायत* की आदिवासी *ग्राम पंचायत गिजरी* में *अमृत सरोवर निर्माण में विलंबित भुगतान* को लेकर जिला पंचायत की पूरी प्रक्रिया अब कठघरे में है। *आयुक्त शहडोल के फैसले ने जिला पंचायत की कार्रवाई की मंशा पर ही सवाल* खड़े कर दिए हैं।
बताया जाता है कि मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत उमरिया ने अमृत सरोवर में भुगतान न करने के मामले में पहले *सचिव सुरेन्द्र शुक्ला को निलंबित* किया। फिर इतने में भी काम नहीं बना तो *सरपंच नन्हू सिंह को भी बलि का बकरा बना दिया*। सचिव-सरपंच पर समान रूप से भुगतान न करने के आरोप थे।
जिला पंचायत उमरिया की इस कार्रवाई से असंतुष्ट सचिव ने आयुक्त शहडोल में अपील कर न्याय की फरियाद लगाई। जिस पर विचारण करते हुए आयुक्त ने जांच प्रतिवेदन और प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर पाया कि जिला पंचायत की कार्यवाही विधि संगत नहीं है और *10.07.2026* को सचिव को *दोषमुक्त कर निलंबन से बहाल* कर दिया।
*आयुक्त ने क्या कहा*
आयुक्त ने अपने पारित फैसले में पाया कि किसी भी शासकीय निर्माण कार्य के भुगतान के लिये तय मापदंड में *उपयंत्री द्वारा कार्य का मूल्यांकन के पश्चात ही भुगतान* किये जाने का प्रावधान है। जब संबंधित उपयंत्री ने मूल्यांकन ही नहीं किया तो *भुगतान की कार्यवाही नहीं हो सकी*।
आयुक्त ने जनपद पंचायत पाली के खण्ड पंचायत अधिकारी के जांच प्रतिवेदन का आधार लेते हुए कहा कि *समय पर उपयंत्री द्वारा कार्य का मूल्यांकन नहीं करने के लिए सचिव-सरपंच को दोषी नहीं ठहराया जा सकता*।
फिर भी गिजरी ग्राम पंचायत में हुई इस कार्रवाई ने आदिवासी जनप्रतिनिधियों के मन में भय पैदा कर दिया है कि *गलती चाहे जिसकी हो, तलवार तो पंचायत के ऊपर ही गिरेगी*।
*उपयंत्री द्वारा मूल्यांकन न करना*
जिला पंचायत ने इस मामले को अपने स्तर से उपयंत्री को आदेशित कर मूल्यांकन के निर्देश देकर सुलझाने की बजाय उलझाने में ज्यादा दिलचस्पी दिखाई। जिला पंचायत की इस स्वेच्छाचारी कार्यशैली से अधिकारों का दुरुपयोग हुआ है।
जांच प्रतिवेदन में यह बात सामने आई कि सचिव ने उपयंत्री से मूल्यांकन की मांग करने के बाद भी उपयंत्री ने *13.05.2025 से 17.12.2025 तक मूल्यांकन क्यों नहीं किया*। साथ ही जिला पंचायत में शिकायत के बाद भी मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने मामले में संज्ञान लेते हुए *उपयंत्री पर कोई कार्रवाई क्यों नहीं की*।
*पूरी प्रक्रिया दोषपूर्ण*
ग्रामीणों और पंचायत प्रतिनिधियों का कहना है कि पंचायत में सरपंच-सचिव की संयुक्त जिम्मेदारी है, लेकिन तकनीकी काम उपयंत्री का है। जब तकनीकी अधिकारी ने ही काम नहीं किया तो *नीचे वालों पर कार्रवाई और ऊपर वालों को बचाना* समझ से परे है।
इस दोहरे मापदंड से पूरे जिले भर में आक्रोश है। सवाल उठ रहा है कि *क्या जिला पंचायत ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए पहले सचिव को फिर सरपंच को बलि का बकरा बना दिया, वहीं उपयंत्री पर वैधानिक कार्रवाई क्यों नहीं की?*
*सरपंच को भी मिल सकती है राहत*
पिछले एक वर्ष से विवादित चल रही ग्राम पंचायत गिजरी के सरपंच *नन्दू सिंह* ने भी आयुक्त शहडोल के न्यायालय में फरियाद लगाकर जिला पंचायत उमरिया के आदेश को रद्द करने की मांग की है। चूंकि इसी आरोप में निलंबित सचिव के मामले में विधि संगत आदेश पारित कर सचिव को दोष मुक्त पाया गया है, इसलिए सरपंच को भी *राहत भरे फैसले की आस* है।



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