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तौल में गड़बड़ी पकड़ी गई, फिर भी वेयर हाउस और अधिकारी दोनों मौज में



 रिपोर्ट @शम्भूनाथ सोनी

"कलेक्टर को भी ठेंगा"*

*तौल में गड़बड़ी पकड़ी गई, फिर भी वेयर हाउस और अधिकारी दोनों मौज में*

*उमरिया* -- जिले में *"जिसकी लाठी उसकी भैंस"* वाली कहावत चरितार्थ हो रही है। कलेक्टर के स्पष्ट आदेश के बाद भी *पूजा धर्मकांटा एण्ड वेयर हाउस बरबसपुर* ने सरकारी खजाने के *₹3,64,115* नहीं लौटाए। विदित होवे की कलेक्टर खाद्य शाखा उमरिया के आदेश क्र 779 दिनांक 29-5-26 के व्दारा पूजा वेयर को उक्त राशि समितियों में जमा करने के आदेश जारी किये गए थे। मामले के संबंध में बताया जाता है कि पूजा वेयर हाउस ने तौल कांटे के सत्यापन कराये बगैर ही धान खरीदी शुरू कर दी थी, जिससे समितियों के तौल कांटे और पूजा वेयर हाउस के तौल कांटे मे हर गाड़ी में लगभग दो क्विंटल साठ किलो धान कम निकली, जिस पर समितियों ने अपने तौल कांटे को बाजार के तौल कांटे  से जांचने के बाद भी पूजा वेयर हाउस के तौल कांटे मे यह कमी बनी रही, तब इस मामले को जिला प्रशासन के समक्ष उठा कर जांच करायी गयी। जिसमें 53 गाडियों में 153.70 क्विंटल धान की चोरी पकड़ी गयी, जिसकी कीमत 3.64 लाख की राशि पांच समितियों को लौटाने के आदेश कलेक्टर उमरिया ने जारी करते हुए एक सप्ताह की अवधि दी थी, जो दो माह में भी जमा नहीं किया गया।  इस मामले ने पूजा वेयर हाउस और उमरिया जिला प्रशासन की कार्य शैली पर तीखे सवाल खड़े कर दिये है, कि कलेक्टर के वसूली के आदेश को कचरा समझने वाले पूजा वेयर हाउस को किस बात की सहूलियत प्रदान की जा रही है उसके ऊपर पुलिस में प्राथमिकी दर्ज क्यों नहीं करायी जा रही है, पूजा वेयर हाउस के अनुबंध को रद्द क्यों नहीं किया जा रहा है। 

*नाप-तौल अधिकारी कहां है?* कलेक्टर के आदेश में साफ तौर पर उल्लेख किया गया है कि "तौलकांटा सत्यापन नहीं किये जाने के कारण" धान  शॉर्टेज हुई। फिर नाप-तौल अधिकारी पर कार्रवाई क्यों नहीं? क्या "सेटिंग" हो गई?

 *किसान का पैसा कौन देगा?*  मालूम होवे की पूजा वेयर हाउस में जिन समितियों के धान का भंडारण हुआ है उनमें धान कम बतायी गयी उनमें घुनघुटी समिति का ₹1.37 लाख, मालाचुआ का ₹1.09 लाख आज भी अटका है। इसका जिम्मेदार कौन?

इस पूरे मामले में सबसे शर्मनाक बात यह निकल कर आयी की  गलती वेयर हाउस की है। फिर भी प्रशासन ने न वसूली की, न लाइसेंस रद्द किया, न जेल भेजा। मतलब *आदेश सिर्फ फाइल में बंद करने के लिए* जारी किए जाते हैं?

*समिति प्रबंधकों का आरोप*: "ऊपर से नीचे तक मिलीभगत है। तभी तो कलेक्टर का आदेश भी ठंडे बस्ते में है।"

अब देखना है कि *कलेक्टर उमरिया* अपने ही आदेश की इज्जत बचाने के लिए क्या कार्रवाई करते हैं या ये मामला भी फाइलों में दब जाएगा।


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