रिपोर्ट @मिर्जा अफसार बेग
बरगवां-अमलाई नगर परिषद की वसूली को लेकर चर्चाएं तेज, बंद स्ट्रीट लाइट और सड़क-सफाई की समस्याओं पर भी नागरिकों ने मांगा जवाब
अनूपपुर। नगर परिषद बरगवां-अमलाई में मंदिरों को टैक्स जमा करने के लिए नोटिस जारी किए जाने का मामला सामने आने के बाद नगर परिषद की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठने लगे हैं। वार्ड क्रमांक 6 में स्थित सार्वजनिक हनुमान मंदिर और दुर्गा मंदिर के पुजारियों का दावा है कि नगर परिषद की ओर से उन्हें टैक्स संबंधी नोटिस दिए गए हैं। नोटिस में मंदिर के क्षेत्रफल की जानकारी लेकर निर्धारित टैक्स जमा करने के लिए कहा गया है।
मंदिरों को जारी किए गए बताए जा रहे नोटिस के बाद स्थानीय स्तर पर यह सवाल चर्चा में है कि सार्वजनिक धार्मिक स्थलों से किस मद में कर की मांग की गई है और इसकी गणना किस नियम के तहत की गई है। हालांकि, इस पूरे मामले में नगर परिषद का आधिकारिक पक्ष अभी सामने नहीं आया है।
1985 में बना सार्वजनिक हनुमान मंदिर
हनुमान मंदिर के पुजारी प्रदीप कुमार मिश्रा के अनुसार मंदिर का निर्माण वर्ष 1985 में हुआ था और यह सार्वजनिक मंदिर है। उनका कहना है कि नगर परिषद की ओर से टैक्स संबंधी नोटिस प्राप्त हुआ है। मंदिर का करीब एक हजार वर्गफीट क्षेत्रफल दर्ज किए जाने तथा उसके आधार पर टैक्स जमा करने की बात कही गई है।
पुजारी के अनुसार, मंदिर सार्वजनिक रूप से संचालित होने के बावजूद कर संबंधी नोटिस मिलने से लोगों में असमंजस की स्थिति है।
1977 से संचालित है दुर्गा मंदिर
इसी तरह अमलाई स्थित दुर्गा मंदिर के पुजारी लक्ष्मीकांत मिश्रा ने बताया कि मंदिर का निर्माण वर्ष 1977 में हुआ था और यह भी सार्वजनिक रूप से संचालित मंदिर है। उनके मुताबिक नगर परिषद की ओर से नोटिस देकर कार्यालय में उपस्थित होकर आवश्यक जानकारी देने और टैक्स जमा करने के लिए कहा गया है।
टैक्स से पहले सुविधाओं पर सवाल
मंदिरों को नोटिस दिए जाने के मामले के साथ ही नगर परिषद क्षेत्र में बुनियादी सुविधाओं की स्थिति को लेकर भी स्थानीय नागरिकों ने सवाल उठाए हैं। नागरिकों का कहना है कि सड़क, सफाई, पेयजल और स्ट्रीट लाइट जैसी मूलभूत सुविधाओं से जुड़ी समस्याएं कई स्थानों पर बनी हुई हैं।
स्थानीय लोगों के मुताबिक नगर परिषद बनने के बाद भी कई वार्डों में अपेक्षित सुविधाएं पूरी तरह उपलब्ध नहीं हो सकी हैं। ऐसे में टैक्स वसूली को लेकर दिखाई जा रही सक्रियता पर नागरिक सवाल उठा रहे हैं।
बापू चौक से हनुमान मंदिर मार्ग की स्ट्रीट लाइट बंद
स्थानीय नागरिकों ने बापू चौक से हनुमान मंदिर बरगवां जाने वाले मार्ग पर स्ट्रीट लाइट लंबे समय से बंद होने की शिकायत की है। लोगों का दावा है कि इस मार्ग की स्ट्रीट लाइट करीब छह महीने से बंद है और शिकायत किए जाने के बावजूद अब तक समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ।
रात के समय पर्याप्त रोशनी नहीं होने के कारण राहगीरों और आसपास के लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। नागरिकों का कहना है कि जब सार्वजनिक मार्गों पर प्रकाश व्यवस्था जैसी मूलभूत सुविधा महीनों से प्रभावित है, तो नगर परिषद को पहले ऐसी समस्याओं के निराकरण पर भी ध्यान देना चाहिए।
सड़क और सफाई व्यवस्था को लेकर भी शिकायतें
क्षेत्र के नागरिकों ने कई स्थानों पर सड़क, नाली और सफाई व्यवस्था से जुड़ी समस्याएं होने का दावा किया है। लोगों के अनुसार कुछ वार्डों में नियमित सफाई नहीं होने से परेशानी बनी रहती है, जबकि सड़क और नाली संबंधी शिकायतों का भी समय पर निराकरण नहीं हो रहा है।
बापू चौक से हनुमान मंदिर तक सड़क की समस्या को लेकर भी लंबे समय से शिकायत किए जाने की बात स्थानीय लोगों ने कही है।
नगर परिषद से इन सवालों के जवाब अपेक्षित
मंदिरों को जारी किए गए बताए जा रहे नोटिस के बाद नगर परिषद की ओर से कई बिंदुओं पर स्थिति स्पष्ट किया जाना जरूरी हो गया है—
मंदिरों से किस प्रकार का टैक्स अथवा शुल्क मांगा गया है?
क्या यह संपत्ति कर है या किसी अन्य मद का शुल्क?
सार्वजनिक मंदिरों पर कर लगाने का कानूनी एवं प्रशासनिक आधार क्या है?
मंदिरों के क्षेत्रफल के आधार पर टैक्स की गणना किस नियम के तहत की गई?
नोटिस में निर्धारित राशि कितनी है?
नगर परिषद क्षेत्र में बंद पड़ी स्ट्रीट लाइट और अन्य जनसमस्याओं के समाधान के लिए क्या कार्रवाई की गई है?
अब परिषद के आधिकारिक जवाब का इंतजार
मंदिरों को टैक्स नोटिस दिए जाने का मामला सामने आने के बाद यह मुद्दा अब स्थानीय चर्चा का विषय बन गया है। एक ओर नगर परिषद द्वारा कर वसूली की कार्रवाई की बात सामने आ रही है, वहीं दूसरी ओर नागरिक सड़क, सफाई, पेयजल और प्रकाश व्यवस्था जैसी मूलभूत सुविधाओं को लेकर सवाल उठा रहे हैं।
फिलहाल पूरे मामले में नगर परिषद बरगवां-अमलाई का आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने आना बाकी है। परिषद का पक्ष सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि मंदिरों से किस नियम और किस मद के तहत टैक्स की मांग की गई है। साथ ही नागरिकों की ओर से उठाई जा रही जनसुविधाओं से संबंधित शिकायतों पर परिषद क्या कार्रवाई करती है, इस पर भी लोगों की नजर बनी हुई है।


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