रिपोर्ट @मिर्जा अफसार बेग
अनूपपुर। नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा घायल युवक की शिकायत पर प्राथमिकी दर्ज कराने की मांग को “पद का दुरुपयोग” बताना तथ्यों और लोकतांत्रिक व्यवस्था की मूल भावना को गलत ढंग से प्रस्तुत करना है। यह बात कांग्रेस जिला अनूपपुर के जिला महामंत्री सत्येंद्र स्वरूप दुबे ने कही।
दुबे ने कहा कि राहुल गांधी ने न तो किसी पुलिसकर्मी को दोषी घोषित किया और न ही किसी व्यक्ति को अपराधी ठहराया। उन्होंने केवल एक घायल युवक के साथ खड़े होकर उसकी शिकायत विधिवत दर्ज करने और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की। उनके अनुसार, शिकायत के बाद दिल्ली पुलिस द्वारा अज्ञात व्यक्ति अथवा व्यक्तियों के विरुद्ध FIR दर्ज किया जाना भी इस बात को स्पष्ट करता है कि मामला जांच योग्य था।
शिकायत दर्ज कराने की मांग करना पद का दुरुपयोग नहीं
सत्येंद्र स्वरूप दुबे ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष का पद किसी व्यक्ति को पुलिस से ऊपर नहीं बनाता, लेकिन यह भी कहीं नहीं कहा गया है कि नेता प्रतिपक्ष किसी नागरिक की शिकायत या कथित अन्याय के मामले में उसकी आवाज नहीं उठा सकता।
उन्होंने कहा कि यदि किसी घायल नागरिक की शिकायत दर्ज नहीं हो रही हो और वह न्याय की मांग कर रहा हो, तो उसके साथ खड़ा होना लोकतांत्रिक राजनीति और जनप्रतिनिधित्व की स्वाभाविक जिम्मेदारी है। राहुल गांधी ने पुलिस को कोई अंतिम निष्कर्ष देने या किसी को दंडित करने का निर्देश नहीं दिया, बल्कि शिकायत दर्ज कर कानून के अनुसार जांच की मांग की।
उच्चस्तरीय जांच और FIR अलग-अलग प्रक्रियाएं
दुबे ने कहा कि किसी घटना की उच्चस्तरीय या न्यायिक निगरानी में जांच चलना और किसी पीड़ित की शिकायत पर FIR दर्ज होना दो अलग-अलग कानूनी प्रक्रियाएं हैं। FIR किसी आरोप को सत्य घोषित नहीं करती, बल्कि वह आरोपों की जांच की प्रक्रिया शुरू करने का माध्यम होती है।
उन्होंने कहा कि इसलिए यह तर्क देना कि किसी अन्य स्तर पर जांच चल रही है तो पुलिस के समक्ष शिकायत ही नहीं की जा सकती, अपने आप में कानूनी निष्कर्ष नहीं है।
पैलेट गन को लेकर उठे सवालों का जवाब जांच से ही मिलेगा
पैलेट गन से युवक के घायल होने के दावे पर उठाए जा रहे सवालों को लेकर दुबे ने कहा कि किसी घटना में कितने लोग घायल हुए, केवल इस आधार पर यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि घटना हुई या नहीं हुई।
उन्होंने कहा कि चोट किस वस्तु या हथियार से लगी, इसका निर्धारण मेडिकल रिपोर्ट, घटनास्थल के साक्ष्य, CCTV एवं वीडियो फुटेज, पुलिस रिकॉर्ड, ड्यूटी रिकॉर्ड, हथियार एवं कारतूस के आधिकारिक हिसाब तथा प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों के आधार पर होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि इसी तरह किसी वीडियो में पैलेट गन दिखाई न देने मात्र से यह साबित नहीं होता कि उसका इस्तेमाल नहीं हुआ। घटनास्थल पर उपलब्ध सभी साक्ष्यों का वैज्ञानिक और निष्पक्ष परीक्षण आवश्यक है।
“कितने लोग घायल हुए” से नहीं, साक्ष्यों से तय होगा सच
सत्येंद्र स्वरूप दुबे ने कहा कि यदि सुरक्षा बलों ने पैलेट गन या पैलेट वाले किसी उपकरण का इस्तेमाल नहीं किया है, तो निष्पक्ष जांच में यह तथ्य सामने आ जाएगा। यदि ऐसा इस्तेमाल हुआ है, तो जांच में यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि उसका इस्तेमाल किस परिस्थिति में, किसके आदेश पर और किन नियमों के तहत किया गया।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस किसी निर्दोष पुलिसकर्मी को दोषी ठहराने की मांग नहीं कर रही है। मांग केवल इतनी है कि पीड़ित की शिकायत विधिवत दर्ज हो, उपलब्ध साक्ष्यों की जांच हो और यदि कोई दोषी है तो कानून के अनुसार उसकी पहचान कर कार्रवाई की जाए।
“क्या राहुल गांधी हर पीड़ित के साथ खड़े होते हैं?” सवाल से मुद्दा नहीं बदलता
दुबे ने कहा कि किसी एक पीड़ित की आवाज उठाने पर यह सवाल करना कि राहुल गांधी हर पीड़ित के साथ क्यों नहीं खड़े होते, मूल मुद्दे से ध्यान भटकाने का प्रयास है।
उन्होंने कहा कि असली सवाल यह होना चाहिए कि किसी नागरिक को अपनी शिकायत दर्ज कराने के लिए किसी बड़े राजनीतिक नेता के हस्तक्षेप की आवश्यकता क्यों पड़े। यदि पुलिस प्रत्येक नागरिक की शिकायत कानून के अनुसार दर्ज कर निष्पक्ष जांच करे, तो किसी व्यक्ति को अपनी आवाज उठाने के लिए किसी नेता के पास जाने की आवश्यकता ही नहीं होगी।
नेता प्रतिपक्ष की भूमिका जनता की आवाज उठाना भी है
सत्येंद्र स्वरूप दुबे ने कहा कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष की भूमिका केवल संसद के भीतर सरकार की आलोचना तक सीमित नहीं है। लोकतांत्रिक संस्थाओं की जवाबदेही, नागरिकों की शिकायत और जनहित के मुद्दों को सामने रखना भी विपक्ष की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि राहुल गांधी का पुलिस थाने जाना किसी जांच अधिकारी की भूमिका निभाना नहीं था। उन्होंने केवल शिकायत दर्ज कराने और निष्पक्ष जांच की मांग की। अब पूरे मामले का फैसला राजनीतिक बयानबाजी से नहीं, बल्कि जांच में सामने आने वाले साक्ष्यों के आधार पर होना चाहिए।
“सच सामने लाने का रास्ता केवल निष्पक्ष जांच”
दुबे ने कहा कि मामले में CCTV फुटेज, मोबाइल वीडियो, मेडिकल रिकॉर्ड, पुलिस की जनरल डायरी, ड्यूटी रिकॉर्ड तथा इस्तेमाल किए गए हथियारों और कारतूसों से संबंधित आधिकारिक रिकॉर्ड की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। इससे घटना की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
उन्होंने कहा, “यदि राहुल गांधी द्वारा उठाया गया सवाल गलत है तो निष्पक्ष जांच उन्हें गलत साबित कर देगी और यदि सवाल सही है तो वही जांच वास्तविक दोषियों तक पहुंचने का रास्ता खोलेगी।”
अंत में सत्येंद्र स्वरूप दुबे ने कहा कि लोकतंत्र में सवाल पूछना पद का दुरुपयोग नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक जिम्मेदारी का हिस्सा है। राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से ऊपर उठकर अब आवश्यकता इस बात की है कि जांच निष्पक्ष, पारदर्शी और साक्ष्य आधारित हो तथा जनता के सामने पूरे मामले की सच्चाई सामने आए।
— सत्येंद्र स्वरूप दुबे
जिला महामंत्री, कांग्रेस जिला अनूपपुर


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