रिपोर्ट @शम्भूनाथ सोनी
*उमरिया --- "विकास" शब्द डिक्शनरी में जिंदा है, सड़क पर नहीं। जनपद पाली के ग्राम घुनघुटी में बस स्टैंड से रेलवे स्टेशन को जोड़ने वाली महज *150 मीटर से आधा किलोमीटर* की सड़क पिछले *5 से 6 साल* से भगवान भरोसे पड़ी है।
बारिश का पानी, कीचड़ और बड़े-बड़े गड्ढे। यही इस सड़क की पहचान बन गई है। नतीजा - आए दिन दुर्घटनाएं। कुछ माह पहले एक युवक का पैर टूट गया। पैदल चलने वाले गिरते हैं, वाहन चालक कोसते हुए दिन गुजार रहे हैं। सबसे ज्यादा पीडा जनक स्थित कस्तूरबा गांधी बालिका छात्रावास और निजी विद्यालयों के नन्हे-मुन्ने बच्चों को होती है जो सुबह से तैयार होकर स्कूल आते है और कोई भी कीचड़ उछाल कर दिन खराब कर निकल जाता है । राष्ट्रीय राजमार्ग से जुडी इस सड़क सिर्फ घुनघुटी की नहीं है, बल्कि यह मार्ग 10- 12 से जोडते हुए संभागीय कार्यालय शहडोल और बडी तुमी होते हुए अमरकंटक से जोडती है।इस मार्ग से रोज सैकड़ों वाहनों की आवाजाही देखी जाती है। फिर भी जिम्मेदार अफसरों को इस मार्ग के निर्माण से बेसुध बन लोगों को खून के आंसू रोने के लिए छोड़ दिया है । सड़क पर जगह-जगह उखड़ी और बडे़ बडे़ गड्ढे खुद चीख-चीख कर अपनी बदहाली बयां कर रहे हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि इस सडक के नव निर्माण कराने के मामले में न सिर्फ प्रशासनिक अधिकारियों ने मुंह मोड रखा है, इस क्षेत्र के विधायक - सांसद भी इस दिशा में पहल करते दिखाई नहीं देते।
1 किलोमीटर की यह सड़क जो ग्रामीणों के लिये पिछले एक दशक से सरदर्द बनी हुई है , अब लोग तंज करते देखे जाते हैं कि अब यह सड़क कांग्रेस सरकार बनवायेगी।




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