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रात के अंधेरे में कसेड़ नदी का कथित दोहन, रेत उत्खनन को लेकर प्रशासन की निगरानी पर उठे सवाल

 


रिपोर्ट @मिर्जा अफसार बेग
बुढार क्षेत्र में शाम ढलते ही सक्रिय होने का ग्रामीणों का दावा, मिनी ट्रकों और ट्रैक्टरों की आवाजाही से ग्रामीण परेशान

शहडोल। बुढार थाना क्षेत्र के केशौरी ग्राम स्थित कसेड़ नदी और मरजाद घाट में रात के समय कथित रूप से रेत उत्खनन किए जाने का मामला सामने आया है। ग्रामीणों का आरोप है कि दिन में अपेक्षाकृत शांति रहने के बाद शाम ढलते ही नदी क्षेत्र में रेत से लदे वाहनों की आवाजाही बढ़ जाती है और देर रात तक उत्खनन का सिलसिला चलता रहता है।

ग्रामीणों के अनुसार, अंधेरे का लाभ उठाकर मिनी ट्रक और ट्रैक्टर नदी क्षेत्र तक पहुंचते हैं। आरोप है कि निर्धारित नियमों और पर्यावरणीय मानकों की अनदेखी करते हुए नदी से रेत निकाली जा रही है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।

रात में बढ़ जाती है वाहनों की आवाजाही

स्थानीय लोगों का कहना है कि कसेड़ नदी और मरजाद घाट के आसपास रात के समय भारी वाहनों की आवाजाही बढ़ जाती है। ग्रामीणों के मुताबिक, कई बार तेज रफ्तार और क्षमता से अधिक भार लेकर चलने वाले वाहनों के कारण ग्रामीण सड़कों को नुकसान पहुंचा है।

ग्रामीणों ने यह भी दावा किया कि रात में चलने वाले वाहनों से दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। उनका कहना है कि प्रशासन को रात के समय विशेष निगरानी अभियान चलाकर स्थिति की वास्तविकता सामने लानी चाहिए।

नदी के पर्यावरण और जलस्तर को लेकर चिंता

लगातार और अनियंत्रित रेत उत्खनन को लेकर ग्रामीणों ने नदी के प्राकृतिक स्वरूप, जल प्रवाह और आसपास के पर्यावरण पर संभावित प्रभाव को लेकर चिंता जताई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि नदी क्षेत्र में नियमों के विपरीत उत्खनन हो रहा है तो संबंधित विभागों को मौके का निरीक्षण कर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।

शिकायतों के बावजूद कार्रवाई पर सवाल

ग्रामीणों का आरोप है कि कथित अवैध उत्खनन को लेकर संबंधित अधिकारियों तक शिकायतें पहुंचाई गई हैं, लेकिन अपेक्षित कार्रवाई दिखाई नहीं दे रही। ग्रामीणों ने पुलिस, खनिज विभाग और प्रशासन से रात के समय संयुक्त जांच एवं वाहनों की जांच कराने की मांग की है।

कथित संरक्षण के आरोपों ने बढ़ाई गंभीरता

मामले को लेकर कुछ ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया है कि रेत कारोबार से जुड़े लोगों में कार्रवाई का भय नहीं है और वे कथित रूप से प्रभावशाली लोगों का संरक्षण होने की बात कहते हैं। कुछ लोगों द्वारा प्रशासनिक तंत्र को पैसे देने संबंधी कथित दावे किए जाने की बात भी सामने आई है।

हालांकि, इन गंभीर आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। यदि ऐसे दावे किए गए हैं तो उनकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि वास्तव में नियमों का उल्लंघन हो रहा है या नहीं और यदि हो रहा है तो उसके लिए जिम्मेदार कौन हैं।

अब निगाह प्रशासन की कार्रवाई पर

कसेड़ नदी और मरजाद घाट में रात के समय होने वाले कथित रेत उत्खनन की वास्तविक स्थिति जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। ऐसे में स्थानीय प्रशासन और खनिज विभाग द्वारा मौके का निरीक्षण, रात में निगरानी तथा वाहनों की जांच कराए जाने की जरूरत है।

ग्रामीणों ने मांग की है कि यदि अवैध उत्खनन की पुष्टि होती है तो संबंधित व्यक्तियों और वाहनों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए। वहीं, यदि आरोप निराधार पाए जाते हैं तो प्रशासन को तथ्य सार्वजनिक कर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।

मामले में संबंधित पुलिस, खनिज विभाग एवं प्रशासन का पक्ष सामने आने के बाद तस्वीर और स्पष्ट हो सकेगी।


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