रिपोर्ट @मंजूर मंसूरी
बड़ा सवालः खरबना-खैरी की सड़कों पर फिर दौड़ने लगे रेत लदे ट्रैक्टर, आखिर किसका 'सुरक्षा कवच' पाकर बेखौफ हैं माफिया?
पुराना सिंडिकेट और नया 'सिपहसालार': क्या पुलिस की नाक के नीचे चल रहा है अवैध उत्खनन का कारोबार ?
शहडोल। शहडोल जिले के गोहपारू थाना क्षेत्र में अवैध रेत उत्खनन का मामला एक बार फिर गरमाने लगा है। पुराने थाना प्रभारी के स्थानांतरण और नए थाना प्रभारी के पदभार ग्रहण करने के बाद कुछ समय के लिए थमा यह अवैध कारोबार अब दोबारा सक्रिय होता दिखाई दे रहा है। ग्रामीणों की मानें तो खरबना और खैरी गाँव की सड़कों पर रेत से लदे ट्रैक्टरों का तांडव एक बार फिर शुरू हो गया है, जो स्थानीय कानून व्यवस्था पर कई गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
नए 'सिपहसालार' ने संभाली कमान :-
पड़ताल में यह चौंकाने वाली बात सामने आई है कि पुराने सिंडिकेट के हटते ही इस पूरे अवैध कारोबार की कमान अब एक नए 'सिपहसालार' ने संभाल ली है। सूत्रों का दावा है कि यह नया सिपहसालार ही अब पूरी 'मैनेजमेंट' देख रहा है और उसी के इशारे पर ट्रैक्टरों की सुरक्षित निकासी सुनिश्चित की जा रही है। शाम होते ही इन सड़कों पर तेज रफ्तार ट्रैक्टरों की गड़गड़ाहट शुरू हो जाती है, जो इस नए सिपहसालार की 'मजबूत पकड़'की तस्दीक करती है।
प्रति ट्रैक्टर वसूली की चर्चाएं गरम :-
क्षेत्र में चर्चा है कि इस अवैध उत्खनन को सुचारू रूप से चलाने के लिए प्रति ट्रैक्टर 2500 से 3000 रुपये तक की 'एंट्री फीस' वसूली जा रही है। ग्रामीणों का आरोप है यह भारी-भरकम राशि इसी नए सिपहसालार के माध्यम से कथित रूप से 'ऊपर' तक पहुँचाई जाती कि है। प्रतिदिन होने वाली इस अवैध वसूली की चर्चाओं ने पुलिस की 'जीरो टॉलरेंस' नीति पर संशय पैदा कर दिया है। सवाल यह उठ रहा है कि आखिर इस नए सिपहसालार को किसका संरक्षण प्राप्त है कि वह नियमों को सरेआम अंगूठा दिखा रहा है?
खौफ के साये में ग्रामीण
रेत लदे ट्रैक्टरों की तेज रफ्तार ने ग्रामीणों की नींद उड़ा दी है। औरतों और बच्चों के लिए सड़कों पर निकलना जानलेवा साबित हो रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने कई बार प्रशासन से गुहार लगाई, लेकिन इस नए सिपहसालार के 'प्रभाव' के आगे अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। ग्रामीणों को उम्मीद थी कि नए थाना प्रभारी के आने से व्यवस्था सुधरेगी, लेकिन नए सिपहसालार की सक्रियता ने उम्मीदों पर पानी फेर दिया है।
प्रशासन की साख पर सवाल :-
नए थाना प्रभारी के आने के बाद जनता को जिस बदलाव की उम्मीद थी, वह अब इस नए सिंडिकेट के कारण धुंधली पड़ती दिख रही है। क्या पुलिस प्रशासन
को इस नए सिपहसालार की करतूतों की भनक नहीं है, या फिर जानकारी होने के बावजूद इसे नजरअंदाज किया जा रहा है? गोहपारू में रेत के अवैध कारोबार से उठता यह धुआं अब साफ इशारा कर रहा है कि पर्दे के पीछे का खेल बदल चुका है।
वसूली का जालः घाटों पर लूट :-
गोहपारू क्षेत्र में अवैध उत्खनन का यह कैंसर सिर्फ खरबना और खैरी तक ही सीमित नहीं है। सूत्रों के मुताबिक, इसी नए 'सिपहसालार' के गुर्गे अब खैरी घाट, महुआटोला, गुल नदी, खाड, बरहा, धनौहाघाट, उल्टा नाला, देवदहा, बोचकी, सकारिया, कुनुक नदी, भुरसी और लोढी जैसे इलाकों में भी सक्रिय हैं। इन क्षेत्रों में भी रेत माफिया नदी का सीना चीरकर कुदरत को जख्म दे रहे हैं। यहाँ भी वही 'वसूली भाई' का पुराना फॉर्मूला चल रहा है एंट्री दो और खनिज संपदा लूट ले जाओ। इन ठिकानों पर हो रही अंधाधुंध खुदाई ने साबित कर दिया है कि इस सिपहसालार की पैठ और भूख, दोनों ही प्रशासन की चुप्पी का फायदा उठा रही हैं।



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