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वन क्षेत्र से रेत की चोरी मामले में विभाग की संलिप्तता

 


रिपोर्ट @संतोष कुमार मिश्रा

बेली के रेत माफिया के सामने नत मस्तक प्रशासन 


बिरसिंहपुर पाली --- बेली के राज बहरा नदी से रेत चोरी का मामला पुराना है, लेकिन अब तक रेत माफिया राजस्व क्षेत्र से रेत भरकर उसकी टी पी कटाकर परिवहन करता रहा है, परन्तु उसकी एक सीमा है और कब तक नदी रेत उगलेगी, जब राज बहरा के राजस्व क्षेत्र में रेत माफिया ने झाडू लगा दी, तब स्वाभाविक है की वह जहाँ भी  रेत मिलेगी वह वहाँ से रेत निकालने की कवायद करेंगे। यही वजह है की उसके निशाने पर  वन विभाग क्षेत्र में आने वाले नदी, नाला और जंगल में ही रेत निकाली जायेगी। इसी कड़ी में आज बेली ग्राम में रेत माफिया के तीन टेक्टर रेत भरने के लिए सुबह सात बजे वन क्षेत्र से रेत निकालने पहुँच गया और दो टेक्टर रेत भरकर निकलने वाले थे ,की वन विभाग की टीम जिसमें उप वन पाल बेली और फारेस्ट गार्ड शामिल थे घटना स्थल पर पहुँच कर वैधानिक कार्यवाही कर रहे थे की वन माफियाओं के सरगनाओं ने पहुँच कर वन विभाग को अपने मुट्ठी मे कैद करते हुए जब्ती, पंचनामा की कार्यवाही को रोकने में महारथ हासिल कर लिया। घटना की सूचना मिलते ही वन परिक्षेत्राधिकारी पाली भी पहुँच कर रेत खाली कराते हुए गाडियों को छुडवा दिये। विश्वसनीय सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक इस मामले में जमकर सौदे बाजी की गयी और अंततः रेत माफिया अपने मंसूबों में फलीभूत हो गया। इस मामले में वन विभाग के अधिकारियों का कहना है की जहाँ से अवैध रेत भरी गयी थी वह राजस्व क्षेत्र में आता है इसलिए कार्यवाही को रोक दिया गया।बताया तो यह भी जाता है की वन विभाग ने सरपंच पति से सरपंच के हस्ताक्षर कराकर यह लिखवा कर रख लिया है की यह रेत ग्राम पंचायत में चल रहे निर्माण कार्य के लिए मंगायी गयी थी। इस तरह बेली ग्राम में रेत का गोरख धंधा अधिकारियों की संलिप्तता से खुलेआम जारी है। इस मामले ने बेली में रेत माफिया के बुंलद हौसलों को एक बार फिर उजागर करके रख दिया है। अपेक्षा है वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी इस मामले की सूक्ष्मतम जांच कर अवैध रेत व्यवसाय पर रोक लगाने की आवश्यक पहल करेंगे।


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