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प्राणी शास्त्र विभाग द्वारा राष्ट्रीय शोध संगोष्ठी का आयोजन

 


रिपोर्ट @जयप्रकाश नामदेव 

पंडित अटल बिहारी वाजपेई शासकीय महाविद्यालय  जयसिंहनगर जिला शहडोल म. प्र. में दिनांक 16 फरवरी 2026 को उच्च शिक्षा विभाग मध्य प्रदेश के आदेशानुसार पी.एम. ऊषा द्वारा प्रायोजित, प्राणीशास्त्र विभाग द्वारा आयोजित एक दिवसीय राष्ट्रीय शोध संगोष्ठी जिसका विषय ENVIRONMENTAL SUSTAINABILITY AND BIODIVERSITY ( जैविक स्थिरता एवं जैव विविधता ) पर भव्य आयोजन महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ.धर्मेंद्र कुमार द्विवेदी जी के कुशल मार्गदर्शन में किया गया।  एक दिवसीय राष्ट्रीय शोध संगोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे  महाविद्यालय के प्राचार्य  एवं मुख्य अतिथि वक्ता, विशिष्ट वक्ता, मुख्य अतिथि,  पी.एम. ऊषा प्रभारी द्वारा मां सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं  दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। विद्यार्थियों के द्वारा सरस्वती वंदना एवं स्वागत गीत की प्रस्तुति की गई।  राष्ट्रीय शोध संगोष्ठी   प्रोफेसर आर. पी. सिंह मुख्य  संरक्षक एवं अतिरिक्त संचालक रीवा तथा अग्रणी महाविद्यालय के प्राचार्य प्रोफेसर मुकेश तिवारी पूर्व कुलपति जी के विशेष संरक्षण में राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन किया गया ।  राष्ट्रीय संगोष्ठी में संभाग स्तरीय मीडिया से बंसल जी, वर्मा जी एवं सिरमोर जी उपस्थित रहे ‌ । अतिथियों का पुष्प गुच्छ, बैज,  स्मृति चिन्ह  एवं शाल श्रीफल से स्वागत किया गया । महाविद्यालय के प्राचार्य द्वारा स्वागत उद्बोधन एवं आशीर्वचन प्रदान किया गया,  साथ ही प्राणीशास्त्र विभाग से श्री राजेन्द्र साकेत  द्वारा विषय पर प्रकाश डाला गया। आज के कार्यक्रम की मुख्य वक्ता डॉ. आरती सक्सेना प्राध्यापक प्राणी शास्त्र प्रधानमंत्री कॉलेज आफ एक्सीलेंस शासकीय विज्ञान महाविद्यालय रीवा रही। 

डॉ. सक्सेना मैडम ने अपने व्याख्यान में बायोपेस्टिसाइड्स के उपयोग को बढ़ावा देने पर जोर दिया एवं सिंथेटिक रासायनिक पेस्टिसाइड्स के हानिकारक प्रभावों को बताते हुए बायोपेस्टिसाइड्स के लाभ के बारे में विस्तार से बताया ।

मैडम ने रासायनिक पेस्टिसाइड के उपयोग से कई प्रकार के परागण करने वाले कीटों को भी नष्ट कर देने की बात बताई , जो कि जैव विविधता एवं लाभदायक कीटों के लिए हानिकारक प्रभाव डालते हैं, साथ ही डॉ  सक्सेना मैडम ने बताया कि बायोपेस्टिसाइड से किसी भी प्रकार की जैव विविधता की हानि नहीं होती,  लाभदायक कीट भी बचे  रहते हैं व पेस्ट कंट्रोल भी आसानी से होता है ।

मैडम ने अपने व्याख्यान में बायोपेस्टिसाइड्स के उपयोग हेतु किसानो को प्रेरित करने की बात कही ।



आज के कार्यक्रम के विशिष्ट वक्ता डॉ. रमेश कुमार अहिरवार गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय बिलासपुर रहे। डॉ. अहिरवार जी ने अपने व्याख्यान में पर्यावरण संरक्षण एवं भारतीय ज्ञान परंपरा में विज्ञान एवं औषधीय की बात कही। डॉक्टर अहिरवार जी ने अपने व्याख्यान में हमारी भारतीय पद्धति का अधिक से अधिक उपयोग एवं ट्रेडिशनल नॉलेज को बढ़ाने पर जोर दिया एवं उसके महत्वपूर्ण पहेलियां पर प्रकाश डाला, साथ ही डॉक्टर अहिरवार जी ने यूनाइटेड नेशंस द्वारा जारी सतत विकास लक्ष्यों के बारे में विस्तार से बताया।  

राष्ट्रीय संगोष्ठी में आभासी पटल से जुड़े  एवं भौतिक रूप से प्रतिभागियों द्वारा शोध पत्र का वाचन किया गया। कार्यक्रम का सफल संचालन एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी के संयोजक प्रो. उत्तम सिंह प्राणीशास्त्र विभाग सहायक प्रा. द्वारा किया गया तथा आभार पी.एम. ऊषा प्रभारी श्री गजेंद्र परते अर्थशास्त्र विभागाध्यक्ष द्वारा सभी का धन्यवाद एवं आभार किया गया। राष्ट्रीय संगोष्ठी में विभिन्न महाविद्यालयों एवं विश्वविद्यालयों से आए शोधार्थी, सहायक प्राध्यापक,  मीडिया बंधु, महाविद्यालय के शैक्षणिक एवं गैर शैक्षणिक स्टाफ एवं  विद्यार्थियों  की गरिमामय  उपस्थिति रही।

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