रिपोर्ट @शम्भूनाथ सोनी
बिरसिंहपुर पाली। जिले के प्रभारी मंत्री एवं अनुसूचित जाति कल्याण विभाग के मंत्री नागर सिंह चौहान का बुधवार को उमरिया जिले का प्रवास निर्धारित था। मंत्री के निज सचिव सुनील कुमार मिश्रा द्वारा जारी प्रोटोकॉल के अनुसार सुबह 9 बजे सर्किट हाउस में स्थानीय कार्यकर्ताओं एवं आमजन से भेंट, 11 बजे अमिलिहा में कार्यक्रम, 12:30 बजे पाली में आयोजित जनकल्याण शिविर में सहभागिता तथा 1:30 बजे ग्राम भिम्माडोंगरी में नल-जल योजना के निरीक्षण का कार्यक्रम निर्धारित था।
हालांकि निर्धारित समय से करीब एक घंटे विलंब से मंत्री लगभग 1:40 बजे अमिलिहा पहुंचे। इसके बाद प्रोटोकॉल के अनुसार उन्हें पाली के जनकल्याण शिविर में पहुंचना था, लेकिन वे पहले भिम्माडोंगरी पहुंचे और वहां से पाली आए। लोगों को उम्मीद थी कि अब मंत्री जनकल्याण शिविर में पहुंचकर हितग्राहियों को विभिन्न योजनाओं का लाभ प्रदान करेंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
पाली पहुंचने के बाद मंत्री सीधे पीईबी रेस्ट हाउस पहुंचे, जहां उन्होंने भोजन किया। इसके बाद उनके स्टाफ ने भी भोजन किया। इधर, जनकल्याण शिविर में सुबह 10:30 बजे से ही बड़ी संख्या में ग्रामीण चिलचिलाती उमस भरी गर्मी में मंत्री के इंतजार में बैठे रहे। लोगों को बताया गया था कि मंत्री के हाथों उन्हें विभिन्न योजनाओं का लाभ प्रदान किया जाएगा।
मंत्री के आगमन की आस में घंटों बैठे लोगों में बड़ी संख्या में महिलाएं भी शामिल थीं। कई महिलाएं अपने दूधमुंहे बच्चों को गोद में लेकर भीषण गर्मी और उमस के बीच मंत्री के इंतजार में बैठी रहीं। वहीं कुछ गर्भवती महिलाएं भी शिविर में मौजूद दिखाई दीं, जिन्हें इस अवस्था में आराम और विशेष देखभाल की आवश्यकता होती है, लेकिन उन्हें भी मंत्री के आगमन की उम्मीद में घंटों तक परेशानी झेलनी पड़ी। लंबे इंतजार और बढ़ती गर्मी के कारण लोगों में थकान, बेचैनी और निराशा साफ दिखाई दे रही थी।
बताया जाता है कि भोजन के बाद मंत्री का काफिला जनकल्याण शिविर की ओर बढ़ा, लेकिन कार्यक्रम स्थल से लगभग 50 कदम पहले ही वाहन ने यू-टर्न ले लिया और काफिला वापस रवाना हो गया। मंत्री के इस अप्रत्याशित प्रस्थान ने वहां मौजूद लोगों को मायूस कर दिया। कई लोगों में नाराजगी भी दिखाई दी, जो घंटों से मंत्री के आगमन की प्रतीक्षा कर रहे थे।
जनता के बीच चर्चा रही कि जनकल्याण शिविर में बुलाए गए लोग प्यास और गर्मी से बेहाल रहे, जबकि जनप्रतिनिधियों के लिए वातानुकूलित विश्राम गृह और भोजन की व्यवस्था प्राथमिकता बन गई। लोगों का कहना था कि यदि कार्यक्रम में शामिल होना नहीं था तो उन्हें घंटों इंतजार के लिए क्यों बुलाया गया?
मंत्री के चले जाने के बाद जिला कलेक्टर राखी सहाय कार्यक्रम स्थल पहुंचीं और विभिन्न योजनाओं से लाभान्वित हितग्राहियों को संबंधित दस्तावेज वितरित किए। अंततः प्रशासन ने कार्यक्रम की औपचारिकता पूरी की, लेकिन जनता के मन में यह सवाल जरूर छोड़ दिया कि आखिर "जनकल्याण" किसका हुआ?
जनता के बीच यह चर्चा भी रही कि जिन लोगों को योजनाओं का लाभ देने के नाम पर सुबह से बुलाया गया था, वे घंटों धूप और उमस में मंत्री का इंतजार करते रहे, जबकि मंत्री महोदय और उनका स्टाफ वातानुकूलित विश्राम गृह में भोजन करने के बाद जनकल्याण शिविर से महज कुछ कदम पहले ही वापस लौट गए।
जनकल्याण शिविर में जनता मंत्री का इंतजार करती रही, और मंत्री महोदय शायद जनकल्याण से पहले अपने भोजन कल्याण को अधिक महत्वपूर्ण समझ बैठे।



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