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पहली बारिश में बह गए विकास के दावे, पाली नगर पालिका की तैयारियों की खुली पोल, बस स्टैंड बना स्विमिंग पूल

 


रिपोर्ट @शम्भूनाथ सोनी

विकास के बड़े-बड़े दावों और साफ-सफाई के लंबे चौड़े

अभियानों का प्रचार करने वाली बिरसिंहपुर पाली नगर पालिका एक बार फिर चर्चा में है। इस बार वजह कोई नई उपलब्धि नहीं, बल्कि पहली ही बारिश में सामने आई व्यवस्थाओं की हकीकत है। कुछ देर हुई बारिश ने नगर पालिका की तैयारियों की ऐसी पोल खोली कि बस स्टैंड क्षेत्र और आसपास की दुकानें पानी में डूब गईं, जबकि व्यापारियों को भारी नुकसान उठाना पड़ा।

नगर के बस स्टैंड के पास स्थित दुकानों में बारिश का पानी घुस जाने से व्यापारियों की परेशानी बढ़ गई। दुकानों के अंदर रखा सामान पानी में भीगकर खराब हो गया। व्यापारियों का कहना है कि हर साल बारिश के मौसम में यही स्थिति बनती है, लेकिन नगर पालिका स्थायी समाधान निकालने के बजाय केवल कागजी दावे करती नजर आती है।

बारिश के दौरान मुख्य नाली उफान पर आ गई और उसका पानी सीधे दुकानों के अंदर घुस गया। हालत यह थी कि सड़क पर इतना पानी भर गया कि दोपहिया वाहनों के आधे पहिए पानी में डूब गए। कई राहगीरों को पानी के बीच से निकलने में भारी मशक्कत करनी पड़ी। वहीं कुछ स्थानों पर पानी घुटनों तक भर गया, जिससे लोगों का आवागमन प्रभावित हुआ।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि बारिश कुछ देर और जारी रहती तो हालात और भी गंभीर हो सकते थे। नगर पालिका द्वारा समय-समय पर नालियों की सफाई और जल निकासी व्यवस्था दुरुस्त होने के दावे किए जाते हैं, लेकिन पहली ही बारिश ने इन दावों की वास्तविकता सामने ला दी।

बस स्टैंड क्षेत्र का नजारा किसी सड़क या बाजार से ज्यादा एक अस्थायी स्विमिंग पूल जैसा दिखाई दे रहा था। बच्चे जहां पानी देखकर उत्साहित नजर आए, वहीं दुकानदारों और आम नागरिकों के चेहरे पर चिंता साफ दिखाई दी। लोगों ने व्यंग्य करते हुए कहा कि नगर पालिका यदि चाहे तो इस क्षेत्र को पर्यटन स्थल घोषित कर सकती है, क्योंकि पहली बारिश में ही यहां जलाशय जैसी स्थिति बन जाती है।

स्थानीय व्यापारियों का आरोप है कि नालियों की नियमित सफाई नहीं होने और जल निकासी की समुचित व्यवस्था न होने के कारण हर वर्ष यही समस्या सामने आती है। कई बार शिकायतें और मांगें करने के बावजूद स्थिति जस की तस बनी हुई है। व्यापारियों का कहना है कि बारिश से हुए नुकसान की जिम्मेदारी आखिर कौन लेगा।

नगरवासियों का कहना है कि विकास केवल विज्ञापनों, बैनरों और बैठकों में नहीं, बल्कि जमीन पर दिखाई देना चाहिए। यदि पहली ही बारिश में बाजार जलमग्न हो जाए, दुकानों में पानी घुस जाए और लोगों को घुटनों तक पानी में चलना पड़े, तो विकास के दावों पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

फिलहाल पहली बारिश ने यह स्पष्ट कर दिया है कि नगर पालिका की तैयारियां मानसून की चुनौती के सामने टिक नहीं सकीं। अब देखना होगा कि नगर पालिका इस समस्या को गंभीरता से लेकर स्थायी समाधान की दिशा में कदम उठाती है या फिर हर साल की तरह बारिश के साथ शिकायतों का सिलसिला भी बहता रहेगा।


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