रिपोर्ट @जयप्रकाश नामदेव
शहडोल। अंधविश्वास और जादू-टोने का डर एक बार फिर खूनी वारदात में बदल गया। शहडोल जिले के सीधी थाना क्षेत्र अंतर्गत चंदौरा गांव में झाड़-फूंक करने आए एक बाबा की कुल्हाड़ी से निर्मम हत्या कर दी गई। प्रारंभिक जांच के अनुसार आरोपी को संदेह था कि मृतक बाबा और उसका भाई जादू-टोना कर उसके परिवार पर अनिष्ट कर रहे हैं। इसी भ्रम और अंधविश्वास के चलते उसने ताबड़तोड़ हमला कर बाबा की मौके पर ही हत्या कर दी।
घटना से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने भी घटनास्थल का निरीक्षण कर मामले की जानकारी ली। पुलिस आरोपी की तलाश में जुटी है और सभी पहलुओं से जांच कर रही है।
बीमार बच्ची के लिए बुलाया था झाड़-फूंक करने
जानकारी के अनुसार, चंदौरा निवासी बुद्धसेन की बेटी लंबे समय से बीमार थी। इलाज के साथ-साथ झाड़-फूंक कराने की मंशा से उसने सीधी निवासी बाबा राज बहोर को अपने घर बुलाया था। झाड़-फूंक की प्रक्रिया चल ही रही थी कि बुद्धसेन का भाई भीमसेन वहां पहुंच गया और अचानक कुल्हाड़ी से बाबा पर ताबड़तोड़ हमला कर दिया। गंभीर चोटों के कारण बाबा राज बहोर ने घटनास्थल पर ही दम तोड़ दिया।
जादू-टोने के शक ने ली एक और जान
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी भीमसेन को विश्वास था कि उसका भाई और बाबा जादू-टोना करते हैं। उसका आरोप था कि इसी वजह से उसके परिवार में लगातार अनहोनी घटनाएं हुईं, बच्चों की मौत हुई और अब उसके भाई की बेटी भी बीमार है। इसी अंधविश्वास और संदेह ने उसे इतना उग्र बना दिया कि उसने इस जघन्य वारदात को अंजाम दे डाला।
एक माह में अंधविश्वास से जुड़ी दूसरी हत्या
यह कोई पहला मामला नहीं है। हाल ही में शहडोल जिले के जयसिंहनगर थाना क्षेत्र में भी जादू-टोने के संदेह में दो सगे भाइयों ने अपनी ही बुजुर्ग रिश्तेदार महिला की कुल्हाड़ी से हत्या कर दी थी। महज एक माह के भीतर अंधविश्वास के कारण हत्या की यह दूसरी बड़ी घटना है, जिसने समाज में फैली कुरीतियों और अंधविश्वास की भयावह सच्चाई को एक बार फिर उजागर कर दिया है।
लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाएं यह संकेत देती हैं कि वैज्ञानिक सोच और जागरूकता के बावजूद समाज के कुछ हिस्सों में अंधविश्वास अब भी गहरी जड़ें जमाए हुए है। विशेषज्ञों का मानना है कि शिक्षा, जागरूकता और कानून का प्रभावी क्रियान्वयन ही ऐसी घटनाओं पर अंकुश लगाने का सबसे प्रभावी माध्यम हो सकता है।


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