रिपोर्ट @सुनील कुमार गौतम
70 करोड़ की स्वीकृत राशि के बावजूद मूलभूत सुविधाओं का अभाव, मेडिकल कॉलेज से महज 200 मीटर दूर रहने वाली जनप्रतिनिधि भी हुईं बेबस
शहडोल। बिरसा मुंडा शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय, शहडोल में मरीजों के लिए मूलभूत सुविधाओं की कमी एक बार फिर उजागर हुई है। अस्पताल में स्ट्रेचर उपलब्ध नहीं होने के कारण परिजनों को एक महिला मरीज को चादर और कंबल के सहारे उठाकर डॉक्टर के पास और वार्ड तक ले जाना पड़ा। इस घटना ने मेडिकल कॉलेज की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जानकारी के अनुसार, ग्राम कुदरी वार्ड क्रमांक-11 की पंच सावित्री कुशवाहा अपनी सास का कमर की हड्डी का उपचार कराने मेडिकल कॉलेज पहुंचीं। काफी देर तक इंतजार और अस्पताल कर्मियों से पूछताछ के बावजूद स्ट्रेचर उपलब्ध नहीं कराया गया। मजबूर होकर उन्होंने अपने परिजनों और परिचितों की मदद से मरीज को चादर के सहारे उठाकर डॉक्टर के कक्ष और वार्ड तक पहुंचाया।
गौरतलब है कि केंद्र एवं राज्य सरकार द्वारा हाल ही में राष्ट्रीय आयुष मिशन के तहत मेडिकल कॉलेज में नई व्यवस्थाओं, बुनियादी ढांचे के विकास और मूलभूत सुविधाओं के लिए 70 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की गई है। इसके बावजूद मरीजों को आवश्यक सुविधाएं नहीं मिलना गंभीर चिंता का विषय है।
सबसे अहम बात यह है कि सावित्री कुशवाहा मेडिकल कॉलेज से महज 200 मीटर दूर स्थित ग्राम कुदरी की जनप्रतिनिधि हैं, जो अपने क्षेत्र के लोगों की समस्याओं के समाधान के लिए हमेशा सक्रिय रहती हैं। यदि एक जनप्रतिनिधि को अपने परिजन के इलाज के दौरान ऐसी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है, तो दूर-दराज और ग्रामीण क्षेत्रों से इलाज के लिए आने वाले मरीजों व उनके परिजनों की स्थिति का सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है।
यह घटना स्वास्थ्य विभाग के दावों और जमीनी हकीकत के बीच के अंतर को उजागर करती है। अब सवाल यह है कि करोड़ों रुपये की स्वीकृत योजनाओं का लाभ आखिर मरीजों तक कब पहुंचेगा और मेडिकल कॉलेज में मूलभूत सुविधाएं कब तक सुनिश्चित हो पाएंगी।


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