रिपोर्ट @मिर्जा अफसार बेग
बुढ़ार। क्षेत्र में रसोई गैस (एलपीजी) उपभोक्ताओं की परेशानियां लगातार बढ़ती जा रही हैं। एक ओर उपभोक्ताओं को समय पर होम डिलीवरी नहीं मिल रही है, तो दूसरी ओर गैस एजेंसी के गोदाम के बाहर सिलेंडरों की कथित कालाबाजारी और गैस चोरी के आरोपों ने व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। उपभोक्ताओं का आरोप है कि उनके हिस्से के सिलेंडरों से गैस निकालकर "आधे भरे सिलेंडर" तैयार किए जा रहे हैं, जिन्हें अवैध रूप से ऊंचे दामों पर बेचकर मुनाफा कमाया जा रहा है।
गोदाम के बाहर ही हो रही कथित सेटिंग
नियमों के अनुसार एलपीजी सिलेंडरों की आपूर्ति सीधे उपभोक्ताओं के घर तक होनी चाहिए, लेकिन बुढ़ार एवं आसपास के क्षेत्रों से लगातार शिकायतें सामने आ रही हैं कि डिलीवरी वाहन कई बार बस्तियों में जाने के बजाय गोदाम के आसपास ही खड़े रहते हैं। आरोप है कि यहीं से सिलेंडर सीधे होटलों, ढाबों तथा ब्लैक मार्केट में बेच दिए जाते हैं। वहीं, जब आम उपभोक्ता गोदाम पहुंचता है तो उसे "स्टॉक खत्म" होने का हवाला देकर लौटा दिया जाता है।
'गैस कटिंग' का खेल: उपभोक्ताओं के हिस्से की गैस पर डाका
स्थानीय लोगों और उपभोक्ताओं का आरोप है कि सिलेंडर गोदाम से निकलने के बाद और उपभोक्ता तक पहुंचने से पहले उनमें से 2 से 3 किलोग्राम तक गैस निकाल ली जाती है। बताया जा रहा है कि 4-5 सिलेंडरों से निकाली गई गैस को एक अन्य खाली सिलेंडर में भरकर नया "आधा या पौना भरा सिलेंडर" तैयार कर लिया जाता है, जिसे बाद में अवैध रूप से बाजार में बेच दिया जाता है।
इस कथित गैस चोरी का सीधा नुकसान आम उपभोक्ताओं को उठाना पड़ रहा है। लोगों का कहना है कि जो सिलेंडर सामान्यतः लगभग एक माह चलता था, वह अब 15 से 20 दिनों में ही समाप्त हो जाता है।
उपभोक्ताओं की बढ़ती मुश्किलें
हफ्तों पहले बुकिंग कराने के बावजूद उपभोक्ताओं को समय पर सिलेंडर नहीं मिल रहा।
गैस गोदामों के बाहर घंटों लाइन में लगने के बाद भी कई लोगों को खाली हाथ लौटना पड़ रहा है।
डिलीवरी वाहनों एवं गोदामों पर वजन तौलने की मशीन या तो उपलब्ध नहीं रहती या फिर उसे खराब बताकर उपभोक्ताओं को सिलेंडर का वजन जांचने से रोका जाता है।
इससे उपभोक्ताओं के मन में सिलेंडर में कम गैस होने की आशंका लगातार बढ़ रही है।
प्रशासन की चुप्पी पर उठ रहे सवाल
लगातार मिल रही शिकायतों के बावजूद स्थानीय प्रशासन और खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग की ओर से अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई सामने नहीं आने से उपभोक्ताओं में नाराजगी बढ़ती जा रही है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते इस कथित गड़बड़ी पर रोक नहीं लगी तो आम उपभोक्ताओं का आर्थिक शोषण लगातार जारी रहेगा।
औचक जांच और सख्त कार्रवाई की मांग
स्थानीय नागरिकों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि गैस एजेंसी के गोदामों और डिलीवरी व्यवस्था की तत्काल निष्पक्ष एवं औचक जांच कराई जाए। साथ ही, यदि गैस कटिंग, कालाबाजारी या अनियमितताओं के आरोप सही पाए जाते हैं तो दोषियों के विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए। उपभोक्ताओं ने प्रत्येक डिलीवरी वाहन में कार्यशील इलेक्ट्रॉनिक वजन मशीन अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराने तथा सिलेंडर वितरण के दौरान उपभोक्ताओं के सामने वजन जांच सुनिश्चित करने की भी मांग की है।


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