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मुक्ति का संदेश हवा में, गांव-गांव तक पहुंच रही अवैध शराब

 


रिपोर्ट @शम्भूनाथ सोनी

बिरसिंहपुर पाली--प्रशासन का 15 से 30 जुलाई तक विशेष जागरूकता अभियान, दूसरी ओर होटलों और ग्रामीण अंचलों में पैकारी से बिक रही शराब, ग्रामीणों में आक्रोश

एक तरफ जिला प्रशासन और पुलिस विभाग 15 जुलाई से 30 जुलाई तक विशेष नशा मुक्ति अभियान चलाकर लोगों को नशे से दूर रहने का संदेश दे रहा है, तो दूसरी तरफ हकीकत यह है कि गांव-गांव और शहर के होटलों, ढाबों में खुलेआम शराब की पैकारी कर बेची जा रही है। दोहरी तस्वीर से प्रशासन के अभियान पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

जिले में नशा मुक्ति के लिए बड़े स्तर पर तैयारी की गई है। कलेक्टर के निर्देश पर सभी जनपद, नगर परिषद और थाना क्षेत्रों में जागरूकता रैली, पोस्टर, बैनर, नुक्कड़ नाटक और स्कूल-कॉलेजों में शपथ कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इस अभियान का उद्देश्य युवाओं को नशे के दुष्परिणामों से अवगत कराना और उन्हें नशा मुक्त जीवन के लिए प्रेरित करना है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा भी शिविर लगाकर नशा छोड़ने के उपाय बताए जा रहे हैं।

लेकिन जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल विपरीत है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि लाइसेंसी शराब ठेकेदारों द्वारा अपने विक्रेताओं के माध्यम से गांव-गांव में मोटरसाइकिल से शराब की पैकारी कराई जा रही है। शाम होते ही शहर के कई होटलों, ढाबों और पान-गुमटियों में अवैध रूप से शराब परोसी जा रही है। निर्धारित मूल्य से अधिक दाम पर शराब बेची जा रही है और ओवर रेट के कारण अवैध बिक्री को और बढ़ावा मिल रहा है।

ग्रामीण अंचलों में स्थिति और भी चिंताजनक है। सुखा, बन्नैदा , छिंदहा, पाली दफाई, बुद्ध ढाबा,बस स्टैंड के पास बिनस होटल, गुरु नानक होटल, शाहपुर स्कूल के पास, सुंदर दादर बाजार, मंठार गेट के पास, सहित कई ग्रामीण क्षेत्रों में शिकायत है कि ठेकेदार के लोग शाम को थैलों में शराब भरकर गांव में पहुंचा देते हैं और ऊंचे दामों पर बेचते हैं। इससे गांव में नशाखोरी बढ़ रही है और घरेलू कलह, मारपीट की घटनाएं सामने आ रही हैं। युवा वर्ग सबसे ज्यादा इस चपेट में आ रहा है।

ग्रामीणों का कहना है कि कई बार आबकारी और पुलिस से शिकायत की गई, लेकिन कार्रवाई केवल खानापूर्ति तक सीमित रहती है। बड़ी कार्रवाई न होने से ठेकेदारों के हौसले बुलंद हैं। लोगों का सवाल है कि जब शासन नशा मुक्ति का इतना बड़ा अभियान चला रहा है, तो अवैध शराब की बिक्री पर रोक क्यों नहीं लगाई जा रही।

इस संबंध में आबकारी अधिकारी का कहना है कि अभियान के दौरान अवैध शराब के खिलाफ सघन जांच चल रही है। होटलों और ढाबों की जांच कर कार्रवाई की जाएगी। वहीं पुलिस का कहना है कि पैकारी करने वालों पर नजर रखी जा रही है और पकड़े जाने पर कड़ी कार्रवाई होगी।

बहरहाल, जरूरत है कि नशा मुक्ति अभियान को केवल पोस्टर-बैनर और भाषणों तक सीमित न रखकर जमीनी स्तर पर अवैध शराब की बिक्री पर सख्ती से रोक लगाई जाए। तभी 15 से 30 जुलाई तक चलने वाले इस विशेष अभियान का उद्देश्य सार्थक होगा और नशा मुक्त समाज का सपना पूरा हो सकेगा।

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