Ticker

6/recent/ticker-posts

कोतमा में मिलावटी दूध-पनीर के कारोबार पर उठे गंभीर सवाल, सख्त कार्रवाई की मांग

 


रिपोर्ट @मिर्जा अफसार बेग
औचक निरीक्षण और सैंपल जांच तेज करने की उठी मांग, खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल

कोतमा। नगर में दूध और पनीर सहित खाद्य पदार्थों में कथित मिलावट को लेकर नागरिकों में चिंता बढ़ती जा रही है। स्थानीय स्तर पर मिलावटी खाद्य पदार्थों की शिकायतें और इस संबंध में सामने आ रही खबरों के बाद अब खाद्य सुरक्षा विभाग तथा जिला प्रशासन से प्रभावी मैदानी कार्रवाई की मांग तेज हो गई है। नागरिकों का कहना है कि दूध, पनीर और अन्य दैनिक उपयोग की खाद्य सामग्री की गुणवत्ता से किसी भी तरह का समझौता सीधे जनस्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है।

दूध और पनीर बच्चों, बुजुर्गों और आम परिवारों के दैनिक आहार का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। ऐसे में यदि इनमें निर्धारित मानकों के विपरीत किसी पदार्थ की मिलावट की पुष्टि होती है, तो यह गंभीर खाद्य सुरक्षा का विषय है। हालांकि, किसी विशेष दुकानदार, डेयरी या प्रतिष्ठान पर मिलावट का आरोप जांच और आधिकारिक रिपोर्ट के आधार पर ही तय किया जाना चाहिए।

शिकायतों के बावजूद कार्रवाई पर सवाल

स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि मिलावट को लेकर समय-समय पर आवाज उठने के बावजूद अपेक्षित स्तर पर नियमित जांच और कार्रवाई दिखाई नहीं देती। लोगों का कहना है कि केवल कागजी कार्रवाई या औपचारिक निरीक्षण से समस्या का समाधान संभव नहीं है। बाजार में बिकने वाले दूध, पनीर और अन्य दुग्ध उत्पादों की वास्तविक गुणवत्ता जांचने के लिए नियमित और अचानक निरीक्षण आवश्यक हैं।

इन कदमों को मिले प्राथमिकता

जनस्वास्थ्य की दृष्टि से खाद्य सुरक्षा विभाग और प्रशासन को कोतमा नगर में विशेष अभियान चलाकर—

दूध, पनीर और दुग्ध उत्पादों के औचक निरीक्षण किए जाएं।

संदिग्ध खाद्य पदार्थों के वैज्ञानिक तरीके से सैंपल लेकर अधिकृत प्रयोगशाला में जांच कराई जाए।

बिना आवश्यक पंजीयन या लाइसेंस के कारोबार करने वालों की जांच की जाए।

मिलावट की पुष्टि होने पर संबंधित खाद्य सुरक्षा कानूनों के तहत कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए।

जांच रिपोर्ट और कार्रवाई की जानकारी नियमानुसार सार्वजनिक की जाए, ताकि लोगों में भरोसा कायम हो।

त्योहारों और अधिक खपत वाले समय में विशेष निगरानी अभियान चलाया जाए।

उपभोक्ताओं को संदिग्ध खाद्य पदार्थों की शिकायत दर्ज कराने के लिए प्रभावी व्यवस्था की जानकारी दी जाए।

रिपोर्ट आने के बाद ही तय हो जिम्मेदारी

मिलावट के आरोप गंभीर हैं, लेकिन किसी भी व्यक्ति या प्रतिष्ठान को बिना जांच दोषी ठहराना उचित नहीं होगा। इसलिए प्रशासन को निष्पक्ष जांच कराकर प्रयोगशाला रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई करनी चाहिए। यदि जांच में मिलावट प्रमाणित होती है तो दोषियों के खिलाफ कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई होना जरूरी है।

कोतमा के नागरिकों की अपेक्षा है कि खाद्य सुरक्षा विभाग इस मामले को गंभीरता से लेते हुए केवल शिकायतों का इंतजार न करे, बल्कि बाजार में सक्रिय निगरानी बढ़ाए। स्वच्छ और सुरक्षित खाद्य पदार्थ उपलब्ध कराना प्रशासन के साथ-साथ खाद्य कारोबारियों की भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। अब जरूरत है कि शिकायतों और आरोपों को वैज्ञानिक जांच के जरिए तथ्य में बदला जाए और दोषी पाए जाने वालों पर प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।




Post a Comment

0 Comments