रिपोर्ट @मिर्जा अफसार बेग
कोतमा। एसईसीएल के जमुना–कोतमा क्षेत्र स्थित आमाडांड ओपन कास्ट खदान से हो रहे लगातार कोयला परिवहन ने स्थानीय लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। भारी ट्रकों की दिन-रात आवाजाही के कारण परिवहन मार्ग और हाईवे पर धूल व कोयले के महीन कणों का गुबार छाया रहता है, जिससे राहगीरों, दोपहिया चालकों और सड़क किनारे रहने वाले परिवारों को गंभीर असुविधा का सामना करना पड़ रहा है।
स्थानीय नागरिकों के अनुसार ट्रकों के गुजरते ही सड़क पर इतनी धूल उड़ती है कि कई बार दृश्यता कम हो जाती है और दुर्घटना का खतरा बढ़ जाता है। सबसे अधिक परेशानी बाइक सवारों, पैदल यात्रियों और आसपास के रहवासियों को होती है, जिन्हें प्रतिदिन धूल भरे वातावरण में जीवन यापन करना पड़ रहा है।
लोगों का कहना है कि धूल नियंत्रण के लिए परिवहन मार्ग पर नियमित पानी का छिड़काव अनिवार्य है, लेकिन यह व्यवस्था पर्याप्त रूप से नहीं हो रही है। कई बार शिकायत किए जाने के बावजूद समस्या जस की तस बनी हुई है।
विशेषज्ञों के अनुसार लंबे समय तक धूल और कोयले के कणों के संपर्क में रहने से आंखों में जलन, एलर्जी तथा श्वसन संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। ऐसे में कोयला उत्पादन के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण और आमजन के स्वास्थ्य की जिम्मेदारी निभाना भी प्रबंधन की प्राथमिकता होनी चाहिए।
स्थानीय नागरिकों ने एसईसीएल प्रबंधन से मांग की है कि परिवहन मार्ग पर नियमित पानी का छिड़काव सुनिश्चित किया जाए, सभी कोयला वाहनों का संचालन सुरक्षा मानकों के अनुरूप कराया जाए तथा धूल नियंत्रण के लिए प्रभावी और स्थायी व्यवस्था लागू की जाए, ताकि क्षेत्रवासियों को राहत मिल सके।


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